हिमाचल के सोलन जिला में फर्जी लाइसेंस बनाने के गोरखधंधे को पुलिस ने बेनकाब करने में सफलता हासिल की है। इस मामले में पुलिस ने चार युवकों को गिरफ्तार किया है।
इसमें गिरोह का मास्टरमाइंड हमीरपुर निवासी सुशील कुमार भी शामिल है। पुलिस ने उसके कब्जे से लेपटाप और स्केनर बरामद किया है।
छानबीन में सामने आ रहा है कि गिरोह का मास्टरमाइंड खुद ही एसडीएम के हस्ताक्षर वाले लाइसेंस जारी कर रहा था।
एक लाइसेंस के बदले लेते थे सात हजार
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे 7000 हजार रुपये में लाइसेंस बनाते थे। ये धंधा काफी समय से चल रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों में चारों युवकों की पहचान आशीष 30, भूपेंद्र 26, संदीप कुमार 33 निवासी साधुपुल और हमीरपुर निवासी सुशील उम्र 27 साल के रूप में हुई है।
एसएचओ अनिल कुमार धौल्टा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी बस चालक को फर्जी लाइसेंस बनाकर सात हजार में देते थे। मामले का पांचवा आरोपी बस चालक फरार है।
2012 का है ये मामला
साल 2012 में सिमरन कोच के मालिक ने चालक का लाइसेंस चेक करते वक्त फर्जी होने का संदेह पुलिस में जताया था। पुलिस ने एसडीएम कार्यालय में इस बारे में छानबीन की जिसमें पाया कि लाइसेंस फर्जी है।
लाइसेंस हरेंद्र कुमार के नाम पर निकाला गया है, लेकिन रजिस्ट्रेशन नंबर किसी और का था। छानबीन में गिरोह का पता चला। दो सालों तक ये आरोपी इस मामले में पुलिस की आंखों में धूल झोंकते रहे।
एसडीएम कार्यालय में हुई छानबीन के बाद पुलिस ने शक के आधार पर कुछ युवकों से पूछताछ की। उसके बाद पुलिस मुख्य आरोपियों तक पहुंची।