बहुचर्चित एचपीसीए मामले में एक और नया खुलासा हुआ है। विजिलेंस ने इस मामले में सबूत जुटाकर वन विभाग के झूठ को पकड़ा है।
वन विभाग ने विजिलेंस को सौंपी रिपोर्ट में बताया था कि धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम के भीतर होटल पेवेलियन निर्माण स्थल पर न तो पेड़ थे और न ही किसी तरह का पौधरोपण हुआ था।
लेकिन विजिलेंस की अभी तक की जांच में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2009-10 में वन महोत्सव से दौरान पूर्व उद्योग मंत्री किशन कपूर ने पौधरोपण किया था। विजिलेंस के अनुसार सरकारी खर्चे पर हुए इस कार्यक्रम के दौरान 1500 से अधिक पौधे रोपे गए थे।
हालांकि इस पौधरोपण के बारे में तत्कालीन वन मंडल अधिकारी और रेंज ऑफिसर ने विजिलेंस को सौंपी रिपोर्ट में जिक्र नहीं किया है। अब सवाल यह उठता है कि जब पौधरोपण किया गया तो होटल निर्माण के लिए कैसे एनओसी दी गई।
इसके अलावा होटल के आसपास मौजूदा पेड़ों की संख्या को देखते हुए विजिलेंस ने एचपीसीए पर अवैध रूप से पेड़ों को काटने का आरोप लगाया था, जिसके आधार पर एफआईआर भी की गई।
इसमें विजिलेंस ने पूर्व वन मंडल अधिकारी, रेंज ऑफिसर सहित राजस्व के भी कई संबंधित अधिकारियों को लपेटा है। डीआईजी विजिलेंस अरविंद शारदा ने बताया कि मामले की जांच हो रही है।
30 साल से ज्यादा पुराने हैं मौजूदा पेड़
होटल द पैवेलियन के लिए लीज पर दी गई भूमि पर अभी भी काफी पेड़ मौजूद हैं। विजिलेंस ने इन पेड़ों की उम्र जानने के लिए नौणी विश्व विद्यालय सोलन के विशेषज्ञों से जांच करवाई थी।
विजिलेंस के अनुसार यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञों की जांच में सामने आया कि मौजूदा पेड़ों की आयु 30 बरस से अधिक है। ऐसे में होटल बनाने के लिए 30 और इससे अधिक की उम्र के पेड़ों को बिना अनुमति काटा गया।