ऊना में स्पेशल जज सीएल कोछड़ की अदालत ने तारकोल के ड्रम गोलमाल मामले में लोक निर्माण विभाग के जेई अशोक कुमार को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को विभिन्न धाराओं में 5 साल कैद और 31 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जिला न्यायवादी एनसी घई ने बताया कि केस की पैरवी लोक अभियोजक चंद्रशेखर भाटिया ने की।
उन्होंने बताया कि अभियुक्त ने वर्ष 2007-08 में लोक निर्माण विभाग के जलग्रां स्थित स्टोर के इंचार्ज के रूप में काम करते हुए तारकोल के सैकड़ों ड्रमों को खुर्द-बुर्द किया था। हालांकि, मामले में चंडीगढ़ की एमके इंटरप्राइजिज ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक मुकेश कुमार और उसके मैनेजर हरजीत उर्फ बिल्ला को भी सह अभियुक्त बनाया गया था।
एक अब भी भगौड़ा
मुकेश कुमार की मौत हो गई, जबकि बिल्ला अभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया है। कोर्ट ने उसे भगौड़ा करार दे रखा है। बताया कि पीडब्ल्यूडी की नोडल एजेंसी हिम एग्रो ने पानीपत स्थित आईओसी रिफाइनरी से तारकोल के 3297 ड्रम 35 ट्रकों में लोड कर ऊना भेजे थे। ऊना में केवल 2240 ड्रम ही पहुंचे, जबकि स्टोर इंचार्ज ने सभी ड्रमों की पेमेंट के साथ एमके इंटरप्राइजिज को सभी ड्रमों की ढुलाई के पैसे अदा कर दिए।
बाद में विजिलेंस विभाग ने मामले की जांच की तो 1057 ड्रमों का गोलमाल पाया। रिकॉर्ड में भी काफी गड़बड़ियां पाई गईं और केस दर्ज कर लिया। उन्होंने बताया कि अदालत ने अशोक कुमार को धारा 120बी के तहत 6 माह कैद, 1000 रुपये जुर्माना, 420 के तहत 3 साल कैद, 5 हजार जुर्माना, 467 में 5 साल कैद, 10 हजार जुर्माना, 468 में 3 साल कैद, 5 हजार जुर्माना और धारा 471 के तहत 3 साल कैद, भ्रष्टाचार निरोधक अभिनियम की धारा 13 के तहत पांच हजार रुपये जुर्माना, और 5 हजार रुपये जुर्माना अदा करने के आदेश दिए हैं।