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ईडी ने एसआईटी से तलब किया फर्जी डिग्री मामले का रिकाॅर्ड

Tue, 28 Jul 2020 12:03 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
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सांकेतिक तस्वीर
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मानव भारती विश्वविद्यालय में सामने आए फर्जी डिग्री मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने एसआईटी से रिकाॅर्ड तलब किया है। ईडी ने इस मामले की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी से विश्वविद्यालय के डिग्री फर्जीवाड़े के दस्तावेज लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच में खुलासा हुआ है कि पिछले 10 वर्षों में करीब चार लाख फर्जी डिग्रियां जारी हुई हैं। बताया जा रहा है कि यह घोटाला करोड़ों रूपये का निकल सकता है। यही कारण है कि ईडी ने इस मामले की जांच करने की योजना बनाई है। इस जांच में फर्जी डिग्री की एवज में करोड़ों रुपये के लेनदेन का पर्दाफाश हो सकता है।

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 फर्जी डिग्री मामले में एसआईटी की जांच चली हुई है। इस जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि मानव भारती विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्रियों के लिए दो विशेष सैल बनाए हुए थे। एक प्रशासनिक ब्लाॅक की सबसे ऊपरी मंजिल पर था जबकि दूसरा पहली मंजिल पर ही था। इन सैल में फर्जी डिग्रियों का रिकाॅर्ड सही ढंग से रखा जाता था ताकि किसी की डिग्री के संबंध में कहीं से भी कोई पड़ताल आती थी तो उसका जवाब रिकॉर्ड के अनुसार ही दिया जाता था। यही कारण था कि विश्वविद्यालय में इतने वर्षों में फल.फूल रहे फर्जी डिग्री के कारोबार पर शक नहीं हो रहा था।

फर्जी डिग्री पर विश्वविद्यालय के अधिकारी ही नहीं बल्कि ड्राइवर व चपरासी से लेकर इन केंद्रों में बैठा कोई भी कर्मचारी पड़ताल कर देता। यह इसलिए किया जाता था ताकि यदि कोई विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री को लेकर सवाल करता तो विश्वविद्यालय उस डिग्री को अपना मानने से इंकार कर देता था और इसके लिए हस्ताक्षर का ही हवाला दिया जाता था। महाराष्ट्र के पुणे में इस विश्वविद्यालय की 2 फर्जी डिग्रियों का मामला सामने आया था तो उस मामले में भी विश्वविद्यालय ने पुलिस को यह कहकर इन दोनों डिग्रियों से पल्ला झाड़ लिया था कि इन पर उसके अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं हैं।
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इस प्रकार के मामलों में विश्वविद्यालय ने उलटे उनकी फर्जी डिग्री बनाने के मामले दर्ज किए। इस मामले को सबसे पहले उठाने वाली और पुलिस में शिकायत करने वाली हरियाणा की महिला के खिलाफ भी ऐसा ही कुछ हुआ था। उस महिला के खिलाफ भी विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री बनाने की पुलिस में शिकायत की गई थीए लेकिन उसके पास कई अहम सुराग होने पर पुलिस ने उनकी शिकायत पर मामला दर्ज किया था। ज्यादातर मामलों में यह डिग्रियां कुरियर के माध्यम से भी भेजी जाती थींए लेकिन ये कुरियर सोलन से नहींए बल्कि देश के अलग.अलग राज्यों से किए जाते थे।

यदि कोई छात्र अपनी डिग्री के लिए विश्वविद्यालय में ही पहुंच जाता था तो उसे भी निराश नहीं किया जाता थाए बल्कि उसी समय डिग्री को तैयार कर संबंधित छात्र को दी जाती थी। विश्वविद्यालय का फर्जी डिग्री का यह कारोबार देशभर में फैला हुआ था। देश के कई राज्यों में इसके एजेंट तैनात थे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय के 2 पंजीकरण नंबर थे। फर्जी डिग्री के लिए अलग से पंजीकरण कोड था। जो विश्वविद्यालय के ऑन रिकार्ड छात्र थेए उनका रजिस्ट्रेशन कोड अलग था। पुलिस ने इस रजिस्टे्रशन कोड से फर्जी डिग्री की परत दर परत खोल दी है।

यूजीसी ने मार्च में जब प्रदेश सरकार को मानव भारती विश्वविद्यालय सहित शिमला के एक निजी विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्रियों की जांच करने के लिए पत्र लिखा थाए तब यह मामला सुर्खियों में आया था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने फर्जी डिग्रियों के बहुत सारे रिकाॅर्ड को राजस्थान स्थित अपने विश्वविद्यालय माधव विश्वविद्यालय को शिफ्ट कर दिया। एसआईटी ने जब इस विश्वविद्यालय में पहली रेड की थी तो वहां पर मानव भारती की ही नहीं बल्कि माधव विश्वविद्यालय की भी सैकड़ों फर्जी डिग्रियां बरामद हुई थीं।

इस मामले में अभी जांच में कई अहम खुलासे होने हैं। उधर, एसपी अभिषेक यादव का कहना है कि ईडी ने मानव भारती विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्रियों का रिकॉर्ड मांगा था जो उनके सुपुर्द कर दिया गया है। एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है। इस जांच में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है

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