विजिलेंस थाना धर्मशाला के बाहर कार्यकर्ताओं के साथ नारेबाजी करने के मामले में आरोपी सांसद अनुराग ठाकुर और पूर्व भाजयुमो अध्यक्ष नरेंद्र अत्री के खिलाफ सीजेएम कोर्ट धर्मशाला की ओर से जारी गैर जमानती वारंट के आदेशों पर सत्र न्यायाधीश धर्मशाला ने रोक लगा दी है।
सीजेएम धर्मशाला ने एक अगस्त को सांसद अनुराग ठाकुर और पूर्व भाजयुमो अध्यक्ष नरेंद्र अत्री के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। सत्र न्यायाधीश धर्मशाला ने अब इस मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को रखी है।
जब तक रिवीजन का फैसला नहीं हो जाता, इस मामले में सीजेएम कोर्ट में आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अखिल सेन चोपड़ा ने सत्र न्यायाधीश धर्मशाला के जारी आदेशों के बारे में जानकारी दी है।
इसलिए जारी हुए थे गैर जमानती वारंट
01 अगस्त को मामले को लेकर सीजेएम कोर्ट में सुनवाई थी। इसमें एचपीसीए प्रवक्ता संजय शर्मा, पूर्व मंत्री प्रवीण शर्मा, वीरेंद्र कंवर, विश्वचक्षु सहित पांच आरोपी सीजेएम कोर्ट में पेश हुए।
मामले में अन्य दो आरोपी अनुराग ठाकुर और नरेंद्र अत्री कोर्ट में पेश नहीं हुए थे। सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा के सत्र का हवाला देते हुए हाजिरी से छूट मांगी थी।
पूर्व भाजयुमो अध्यक्ष नरेंद्र अत्री ने बीमार होने के चलते व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए आवेदन किया था। न्यायालय ने आवेदनों को रद्द कर गैर जमानती वारंट जारी कर दिए थे।
थाने के बाहर की थी नारेबाजी
अक्तूबर 2013 में विजिलेंस थाना धर्मशाला में एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को सोसायटी से कंपनी बनाने के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि 24 अक्तूबर 2013 को विजिलेंस थाना धर्मशाला में अनुराग ठाकुर समर्थकों सहित नारेबाजी करते हुए पहुंच गए थे।
विजिलेंस ने इसकी शिकायत धर्मशाला थाने में की थी। धर्मशाला पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद पेटी चालान पेश किया था। इसके बाद अनुराग सहित सात लोगों को सम्मन जारी किए गए थे।