लेकिन सोमवार को सामने आए इस घटनाक्रम से इन निर्देशों की हकीकत भी सामने आ गई। इस दौरान राह चलते एक युवक ने बच्चों का फोटो खींच लिया। इसके बाद स्कूल के अध्यापकों ने बच्चों को इस काम से हटा दिया। अब सोचनीय पहलू है कि आखिर बच्चों से इस प्रकार का कार्य करवाना कहां तक सही है।
अगर स्कूल में कमरों का निर्माण कार्य हो रहा था तो क्या इस कार्य को करवाने के लिए बच्चों से मजदूरों जैसा काम लेना सही है। सवाल यह भी उठता है कि क्या पैसों को बचाने या मजदूरों की दिहाड़ी स्वयं लेने के लिए बच्चों से इस तरह का कार्य करवाया जा रहा था।
फोटो खींचने वाले युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल में बच्चों से ईंटें ढुलवाने का काम करवाया जा रहा था। आखिर किसके कहने से यह कार्य करवाया गया है इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन स्कूल में अध्यापकों की उपस्थिति में यह सब हो रहा था। आखिर किसके कहने पर बच्चों से ये काम करवाया गया। उसे यह पता नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक जिस युवक के फोटो खींचने पर स्कूल के कुछ अध्यापकों ने आपत्ति भी जताई थी। इस दौरान अध्यापक की युवक के साथ कहासुनी भी हो गई। स्कूल के एसएमसी प्रधान अनिशा शर्मा ने बताया की वह अभी अपने निजी काम से बाहर हैं।
स्कूल में बच्चों से इस प्रकार का कार्य करवाने की जानकारी मिली है। इसको लेकर स्कूल मुख्याध्यापक से बात की गई है। स्कूल पहुंचकर इसकी जानकारी ली जाएगी।स्कूल के मुख्य अध्यापक राजपाल जगौता ने कहा कि इस तरह का कोई भी वाक्या स्कूल में नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि पहले दिन कम संख्या में बच्चे स्कूल में आए थे। स्कूल परिसर के बाहर बच्चे क्या कर रहे थे उन्हें जानकारी नहीं है। स्कूल के बच्चों को किसी प्रकार का काम करने को नहीं कहा जाता है।