सत्ता में आने के बाद जयराम सरकार ने अपने मंत्री रामलाल मारकंडा की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग से जांच कराई जिसमें साल 2013-14 से 2016-17 तक 2.38 लाख अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति जारी करने के दौरान हुई गड़बड़ी की बात सामने आई। इसी अवधि के दौरान 2772 शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति वितरित की गई जिसमें 266 निजी शिक्षण संस्थान शामिल थे।
निजी संस्थानों को 210 करोड़ और सरकारी संस्थानों को 56 करोड़ की राशि दी गई। 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19915 को चार मोबाइल फोन नंबरों से जुड़े बैंक खातों में राशि जारी की गई। क्योंकि मामला कई बड़े शिक्षण संस्थानों व दूसरे राज्यों में स्थित संस्थानों से जुड़ा था, ऐसे में प्रदेश सरकार ने इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। इसके बाद अब मामला दर्ज कर सीबीआई ने जांच शुरू की है।
राष्ट्रीय स्तर पर बैंकों में हुए फ्राड से जुड़े मामलों की जांच कर रही सीबीआई की दिल्ली की टीमों ने भी हिमाचल समेत 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छापे मारे। इस दौरान कई अलग अलग तरह के संस्थानों में छापों की सूचना है।
सूत्रों का कहना है कि इस मामले का लिंक बीते दिनों आयकर विभाग के बर्खास्त वरिष्ठ अधिकारी के मामले से जुड़ा है। इस मामले में पिछले दिनों भी सीबीआई ने कई राज्यों में छापे मारकर बैंक व कई अन्य संस्थानों का रिकॉर्ड खंगाला था।