नोटबंदी के दौरान हिमाचल के जिला सिरमौर के मुख्यालय नाहन स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच में नियमों को ताक पर रखकर नोटों की बदली की गई। नोटबंदी के दौरान नोट बदलने के लिए न सिर्फ बच्चों के आधार और आईडी का इस्तेमाल किया गया, बल्कि ऐसे लोगों के भी आईडी को इस्तेमाल किया गया जो चलने में भी सक्षम नहीं थे। प्रारंभिक जांच के बाद अब सीबीआई की शिमला शाखा ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
बैंक मैनेजर समेत दो कारोबारियों और एक सेवानिवृत्त अधिकारी को इसमें नामजद किया गया है। जांच में यह बात सामने आई है कि नोट बदलने के लिए विभिन्न व्यक्तियों की आईडी का भी करंसी बदलने को इस्तेमाल किया गया लेकिन एक्सचेंज फार्म में हैंड राइटिंग एक जैसी ही थी। सूत्र बताते हैं कि सीबीआई को सूचना मिली थी कि नोटबंदी के दौरान यूनियन बैंक की नाहन शाखा में कमीशन के आधार पर एक हजार और 500 रुपये के पुराने नोटों को बदला जा रहा है।
सीबीआई को इस तरह मिला सुराग
केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार एक दिन में एक व्यक्ति चार हजार रुपये तक के नोट बदल सकता था लेकिन शाखा में बल्क में नोटों की बदली की गई। 23 दिसंबर को सीबीआई की टीम ने शाखा में दबिश देते हुए कुछ दस्तावेज, कंप्यूटर की हार्ड डिस्क समेत डीवीआर अपने कब्जे में लिया जिनकी प्रारंभिक जांच-पड़ताल के बाद सीबीआई ने पाया कि बैंक के प्रबंधक नीरज नौटियाल ने नियमों
को ताक पर रखकर कमीशन के लिए प्रवेश बंसल, राजेश्वर लोहिया और सुशील कुमार गोयल की पुरानी करंसी को नई करंसी में बदल दिया। सीबीआई की शिमला शाखा ने प्रवेश बंसल, राजेश्वर लोहिया और सुशील कुमार सहित बैंक प्रबंधक नीरज नोटियाल पर आईपीसी की धारा 420 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया है। सुशील कुमार बिजली बोर्ड से अधिशासी अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
बिना एक्सचेंज फार्म के ही कर डाला ये कारनामा
शुरूआती जांच में यह बात सामने आई है करीब 5.89 लाख रुपये के 500-1000 के नोटों को बदला गया है। इस दौरान एक लाख रुपये के पुराने नोटों को बिना एक्सचेंज फार्म और बिना बैंक के सर्वर में एंटर किए बदल दिया गया। खास बात यह है कि करीब 84 हजार
रुपये के एक्सचेंज फार्म नोट बदलवाने वाले व्यापारी ने नोट बदलने के कई दिन बाद मुहैया कराए। ये फार्म बैंक के गार्ड के जरिये शाखा प्रबंधक को पहुंचाए गए थे। इसके अलावा जांच में बैंक की कैश बैलेंस बुक और कैश रसीद व कैश वितरण चार्ट में करीब 1.88 लाख रुपये की अनियमितता थी।