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शातिर महिला एजेंट ने बुजुर्ग से कर डाली 21 लाख की धोखाधड़ी

Sun, 12 Feb 2017 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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शिमला के एक निजी बैंक की महिला एजेंट ने बुजुर्ग खाताधारक के साथ करीब साढ़े 21 लाख का फ्रॉड कर दिया। खाताधारक को इसकी भनक तक नहीं लगी। साल 2014 में खाताधारक की मौत भी हो गई। मृतक खाताधारक की पत्नी महिला एजेंट को जानती थी और पता कि उसके पति ने एजेंट से एफडी करवाई है।
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जब उन्होंने छानबीन की तो फ्रॉड का खुलासा हुआ। आरोप हैं कि एजेंट ने सारी राशि डकार ली है। इस मामले में मृतक की पत्नी की शिकायत के आधार पर 24 मई 2016 को पुलिस में केस दर्ज करवाया गया है। मृतक की पत्नी और उसके बेटे ने प्रेस कांफ्रेंस में यह आरोप लगाए हैं।

दोनों का कहना है कि ठगी का यह मामला सीआईडी को सौंपा जाना चाहिए। हालांकि, पुलिस दावा कर रही है कि मामले की छानबीन जारी है। खाताधारक सुरेंद्र मोहन भटनागर की 11 दिसंबर 2014 में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी को इसका पता चला। जब उसने और उसके बेटे मंजुल मोहन भटनागर ने  बैंक में जा कर एफडी से संबंधित जानकारी मांगी।
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बैंक में जमा नहीं करवाए 21 लाख

इस पर उन्होंने जब एजेंट से लाखों की एफडी के दस्तावेज के बारे पूछा तब जाकर उन्हें इस लाखों की ठगी का सुराग लगा। इस पर पत्नी ने 24 मई 2016 को थाना सदर में दर्ज करवाया। जिसमें उन्होंने बैंक में जमा करवाने को दिए गए 21 लाख 42 हजार की राशि जमा न करवाकर ठगी करने के आरोप लगाया। पुलिस इस पर मामला दर्ज कर छानबीन कर रही है, जिसमें लाखों की हेराफेरी की बात सामने आ रही है। 

सुरेंद्र मोहन भटनागर के पुत्र मंजुल मोहन भटनागर ने पूरे मामले का शनिवार को पत्रकारों के सामने खुलासा किया। जिसमें उसने दस्तावेजों के साथ पूरा मामला बताया और लाखों की इस ठगी के मामले की जांच सीआईडी को सौंपने की मांग की। इधर, डीएसपी सिटी राजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि शिकायत के बाद मामले की जांच की जा रही है।

ऐसे बना बुजुर्ग ठगी का शिकार

पुलिस में दर्ज इस लाखों की ठगी की शिकायत में पत्नी उमा भट्टनागर ने कहा कि महिला बैंक एजेंट ने उसके पति से एफडी और बैंक अकाउंट खोलने के लिए करीब 21 लाख 42 हजार कैश लिया। जिसमें से उसने बैंक में सिर्फ 3.9 हजार रुपये जमा करवाए। यह राशि भी उसने चैक लगाकर निकाल ली। इसके बाद बैंक अकाउंट से लिंक कर एफडी बनवाने के लिए लाखों की नकद की राशि दी। जिसे एजेंट ने बैंक में जमा ही नहीं करवाया।

शिकायतकर्ता महिला की छात्रा है एजेंट 
शिकायतकर्ता उमा जो एक निजी स्कूल में अध्यापिका थी। एजेंट उसकी छात्रा रही थी, इस कारण दोनों की जान पहचान हुई। 2007 में हुई इस मुलाकात के बाद एजेंट ने टारगेट पूरा करने के लिए बैंक खाता खुलवाने की बात पर उमा भटनागर ने उसे अपने पति से मिलवाया। इसके बाद एजेंट का घर आना जाना शुरू हो गया। 

एजेंट ने अपने बैंक की बुजुर्गों के लिए चलाई जा रही योजनाओं और उससे होने वाले लाभ का प्रलोभन दे सारा पैसा बैंक की योजनाओं में निवेश करने को कहा। जिस पर बुजुर्ग ने भरोसा कर तीन लाख नब्बे हजार कैश देकर खाता खुलवाने को दे दिए।  इसके बाद पैसा देने का क्रम आगे भी जारी रहा। 
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एजेंट के पति ने भी कबूली थी पैसे लेने और लौटाने की बात

ठगी का शिकार हुए बुजुर्ग के पुत्र पुत्र मंजुल मोहन भटनागर ने पत्रकारों से बात करते हुए इस पूरे मामले का खुलासा किया। इसमें उसने ठगी की पूरी कहानी को दस्तावेजों के साथ सामने रखा। उन्होंने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद लक्कड़ बाजार चौकी में एजेंट

महिला के खिलाफ शिकायत देने के बाद 6 मई 2016 को चौकी बुलाए गए एजेंट के पति ने लिखित में कबूला था कि मृतक सुरेंद्र भटनागर ने  एफडीआर जमा करवाने को जो राशि करीब 21, 42000 देने हैं, उसमें से वह 21 मई 2016 को दस लाख दे देगा, शेष राशि वह अगली किस्त में अदा कर देगा। यदि वह असमर्थ रहता है, तो उसके और उसकी पत्नी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को वे स्वतंत्र होंगे।
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