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साइबर ठगी के मामलों में बड़ी संख्या में अपनों का ही हाथ, जांच में हुआ खुलासा

Sun, 07 Jun 2020 10:52 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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साइबर सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल में साइबर क्राइम के मामले बढ़ते जा रहे हैं। पिछले कुछ समय में सामने आए ऐसे मामलों में किसी परिचित, रिश्तेदार, कर्मचारी और नौकर के संलिप्त होने की बात आई है। साइबर क्राइम सेल ने लोगों से सचेत रहने की अपील की है। शिमला निवासी सुनीता भारद्वाज (81) ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी कि उनके खाते से साढ़े तीन लाख नेट बैंकिंग के माध्यम से निकाले गए हैं।
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जांच में ठग की पहचान सुन्नी निवासी दीपराम के रूप में हुई। पता चला कि युवक महिला के घर में नौकरी करता था। पैसे की निकासी को इंटरनेट के माध्यम से निजी फोन व शिकायतकर्ता के मोबाइल का इस्तेमाल करता था। उसने अधिकतर राशि ऑनलाइन गेमिंग में खर्च की है। जेकेआर मोटर्स कंपनी की ओर से शिकायत की गई कि इंटरनेट के माध्यम से एक्सेस कर कंपनी का डाटा डिलीट कर दिया है।

 
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जांच में पाया गया कि कंपनी के निष्कासित कर्मचारी संजीव कुमार ने डाटा डिलीट किया है। एक अन्य मामले में रामपुर निवासी सूरतराम ने खाते से 3,50,000 रुपये निकाले जाने का मामला साइबर थाना में दर्ज करवाया। जांच में पाया गया कि यह राशि शिकायतकर्ता के मोबाइल का उपयोग कर उसके भाई के बेटे ललित ने निकाली है। एडिशनल एसपी साइबर क्राइम नरवीर राठौर ने बताया कि लोगों को अपने नेट बैंकिंग के एक्सेस की जानकारी को बेहद सुरक्षित रखना चाहिए। आज के दौर में लोग मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर से बैंकिंग करते हैं।

ऐसे में उन्हें उपकरणों पर हमेशा सुरक्षित पासवर्ड लगा कर रखना चाहिए। उसकी जानकारी किसी को नहीं देनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सोशल मीडिया व इंटरनेट बैंकिंग के लिए मोबाइल नंबर, जन्मतिथि या नाम को पासवर्ड न रखें। साइबर थाना शिमला में साइबर अपराधों से संबधित 1638 शिकायतें वर्ष 2019 में तथा वर्ष 2020 में अब तक कुल 1264 शिकायतें मिली हैं। साइबर थाना ने अब तक लगभग 25 लाख रुपये शिकायत कर्ताओं के खातों में रिफंड करवाए हैं। 
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