प्रदेश विश्वविद्यालय में गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति, भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत करवाए जाने को लेकर दायर याचिका पर उच्च न्यायालय में मंगलवार को सुनवाई हुई। न्यायालय ने विश्वविद्यालय को नियमित भर्ती होने तक शिक्षकों की कमी से जूझ रहे विभागों में स्टॉप गैप अरेंजमेंट या अनुबंध के आधार पर तैनाती की संभावनाएं तलाशने को कहा।
न्यायालय ने सुझाव दिया कि संभावित नियुक्तियों में यह स्पष्ट किया जा सकता है कि नियमित भर्ती सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार ही की जाएगी। स्टाप गैप अरेंजमेंट या अनुबंध पर तैनात किए जाने वाले अभ्यर्थियों का नियमितिकरण पर कोई अधिकार नहीं रहेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने प्रार्थी धर्मपाल सिंह द्वारा दायर की याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किए।
प्रार्थी ने विश्वविद्यालय में अध्यापकों की नियुक्तियों में धांधलियों का आरोप लगा रखा है और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रार्थी ने विवि में होने वाली भर्तियों को किसी निष्पक्ष एजेंसी से करवाने का आग्रह भी किया है। मामले पर अब अगली सुनवाई को 19 दिसंबर की तिथि तय की है।