भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान परिसर से शुरू हुआ भूस्खलन समरहिल शिव बावड़ी में भारी तबाही मचा गया। अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे की सही वजह अब तक सामने नहीं आ पाई है। हालांकि, बादल फटने का अंदेशा बताया जा रहा है। संस्थान परिसर में बने पानी के टैंकों से लीकेज की बात भी की जा रही। यहां पानी के दो टैंक हैं। एक टैंक लॉन के ठीक नीचे है। जिसकी क्षमता करीब एक लाख लीटर पानी की है, दूसरे टैंक की क्षमता 30 से 40 हजार लीटर पानी की बताई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि जिस जगह से भूस्खलन हुआ, वहां से एक टैंक की दूरी करीब 50 मीटर है और यह छोटा टैंक है।
टैंक में मौजूद पानी इतनी तबाही नहीं कर सकता, ऐसा प्रशासन का मानना है। इन सब चर्चाओं के बीच शुक्रवार शाम पांच बजे उपायुक्त मौके पर पहुंचे और उन्होंने दोनों टैंकों और घटनास्थल की दूरी का मुआयना किया। उन्होंने निरीक्षण के दौरान पाया कि किसी भी टैंक से कोई लीकेज नहीं हुई है। टैंकों में मौजूद पानी इतनी बड़ी तबाही मचा सकता है। टैंकों की दूरी घटनास्थल से करीब पचास मीटर दूर है। यह घटना बादल फटने से ही संभव है। उपायुक्त आदित्य नेगी ने कहा कि दोनों पानी के टैंक सुरक्षित हैं। जांच में पाया गया है कि वहां से कोई लीकेज नहीं हुई है।