सूत्रों ने बताया कि कुछ दिन पहले मुख्य सचिव बीके अग्रवाल की अध्यक्षता में बजट घोषणाओं पर हुई एक बैठक में पशुपालन और उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मुख्यमंत्री के आश्वासनों को गंभीरता से लें। प्रदेश में एक महीने के भीतर जहां गोसेवा आयोग का गठन किया जाए, वहीं गोमूत्र आधारित उद्योगों को लगाने के लिए पतंजलि योगपीठ का दौरा किया जाए।
वहां अपनाई जा रही प्रणाली और व्यवस्था का अध्ययन किया जाए और यह तय करें कि प्रदेश में किस तरह के गोमूत्र आधारित उद्योग लगाए जा सकते हैं। अब उद्योग और पशुपालन विभाग के अधिकारी प्रशिक्षण लेने के लिए हरिद्वार जाने की तैयारी में हैं।