डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के बाद हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेज चंबा में अब मरीज को ओपीडी में जाने से पहले कोविड टेस्ट करवाना होगा। यही नहीं, उसके तीमारदार को भी इसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने यह व्यवस्था गुरुवार से लागू कर दी है। इसके तहत बाकायदा स्वास्थ्य विभाग ने दो टीमों का गठन किया है।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से लिए गए इस निर्णय का मुख्य मकसद संक्रमित मरीजों से फैलने वाले संक्रमण को रोकना है। गौरतलब है कि जिले में नौ हजार से अधिक लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। साथ ही अब कोरोना की दूसरी लहर में कुछ लोगों की बढ़ती लापरवाही अन्य के लिए भी घातक बनती दिख रही है। इससे कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक सैंपलिंग करवाने के लिए लोग भी आगे नहीं आ रहे हैं। ऐसे में स्टाफ की कमी और लोगों की लापरवाही भी संक्रमण को बढ़ावा देने का काम कर रही है।
ऐसे में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने निर्णय लिया है कि मेडिकल कॉलेज चंबा की ओपीडी में पहुंचने वाले प्रत्येक मरीज और उसके तीमारदार को पहले अपनी सैंपलिंग करवानी होगी। सैंपलों की जांच रैट में होगी। रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही मरीजों और तीमारदारों को ओपीडी में प्रवेश मिलेगा। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज को स्थितिनुसार कोविड अस्पताल या फिर होम आइसोलेशन में रखा जाएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने दो टीमों का गठन किया है। ये टीमें ओपीडी और फ्लू क्लीनिक में सैंपल एकत्रित करेंगी। फ्लू क्लीनिक में 24 घंटे सैंपलिंग की व्यवस्था रहेगी तो वहीं, ओपीडी में सुबह नौ से लेकर दोपहर दो बजे तक सैंपलिंग की व्यवस्था रहेगी।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि लोग सैंपल देने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमित और सामान्य व्यक्ति का पता लगाना स्वास्थ्य विभाग के लिए पेचीदा होता जा रहा है। लिहाजा, अब ओपीडी में मरीजों और उनके तीमारदारों को कोविड टेस्ट करवाने के बाद ही प्रवेश मिलेगा। रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही उन्हें ओपीडी में प्रवेश मिलेगा। कहा कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ही यह कदम उठाया गया है। इसके लिए लोगों का सहयोग भी आवश्यक है।