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सह आचार्य भर्ती पर न्यायालय का फैसले सही : एसएफआई

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एचपीयू के गणित विभाग का मामला
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बोले, पूर्व कुलपति के कार्यकाल में हुई भर्तियों की हो न्यायिक जांच
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एसएफआई की विवि इकाई ने विवि के गणित विभाग के सह आचार्य पद पर हुई भर्ती के मामले को लेकर आए उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है।
एसएफआई ने पूर्व कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार के कार्यकाल में विवि में हुई तमाम शिक्षकों की भर्तियों की न्यायिक जांच करवाने की मांग की है। एसएफआई की विवि इकाई के अध्यक्ष संतोष कुमार और सचिव सन्नी सेक्टा ने कहा कि कोरोनाकाल में 2019-20 में पूर्व कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार के कार्यकाल में विवि शिक्षकों की भर्तियों को जारी रखा गया। इनके कार्यकाल में विवि में हुई भर्तियों में बड़े स्तर पर शैक्षणिक भ्रष्टाचार हुआ है। एसएफआई ने आरटीआई में जुटाए भर्ती से संंबंधित दस्तावेजों के प्रमाण के साथ इन भर्तियों में हुई गड़बड़ियों की लगातार जांच की मांग की।
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सूचना का अधिकार कानून के तहत जुटाए दस्तावेजों में विवि में पूर्व कुलपति के कार्यकाल में हुई शिक्षक भर्तियों में 70 फीसदी में गड़बड़ी मिली है। उच्च न्यायालय ने गणित विभाग में सह-आचार्य के पद के लिए साक्षात्कार कोरोना काल के दौरान करवाए जाने, भर्ती नियमों की अनदेखी करने और पूरी प्रक्रिया को फॉलो न करने का निर्णय दिया है। न्यायालय ने इस भर्ती को गलत करार दिया है। संतोष और सन्नी ने न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि विवि के अन्य विभागों में भी इसी तरह से भर्ती के नियमों और योग्य लोगों की अनदेखी की गई है। इसकी यदि निष्पक्षता से जांच हो तो भर्तियों में गड़बड़ियों की सच्चाई सामने आ जाएगी। एसएफआई नेताओं ने उच्च न्यायालय के इस फैसले का स्वागत किया और प्रदेश सरकार से पूर्व कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार के कार्यकाल में हुई शिक्षकों की सभी भर्तियों की न्यायिक जांच करवाने की मांग की है। अयोग्य भर्ती किए लोगों को बाहर कर पात्र और काबिल लोगों की भर्ती करने की मांग की है। चेताया कि यदि भर्तियों की सरकार न्यायिक जांच नहीं करवाती है तो एसएफआई इसको लेकर आंदोलन छेड़ देगी।
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