हालांकि, विवाद बढ़ा तो कपूर ने प्लाट वापस कर दिया। मामले में हिमुडा के तत्कालीन सीईओ एसके शर्मा पर भी बिना निदेशक मंडल की मंजूरी भी न लेने का आरोप लगा। वीरभद्र सरकार के दौरान प्रारंभिक जांच के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने कपूर व अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया, लेकिन वीरभद्र सरकार में ही जांच ठंडे बस्ते में चली गई।