क्रिप्टो करंसी मामला : अदालत की टिप्पणी, आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं, देश की अर्थव्यवस्था करते हैं प्रभावित
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80 हजार लोगों से की गई है धोखाधड़ी अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अरबों के क्रिप्टो करंसी मामले में अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। ऐसे मामलों में जमानत देते समय सार्वजनिक हित, राज्य के हित और समाज पर प्रभाव को प्राथमिकता दी जाती है।
विशेष न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने क्रिप्टो करंसी घोटाले के मामले में आरोपी विजय कुमार जुनेजा की अंतरिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। विजय कुमार जुनेजा पंजाब के जीरकपुर का निवासी हैं। वह कांगड़ा जिले के पालमपुर थाने में दर्ज मामले में आरोपी हैं। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 धोखाधड़ी और 120-बी आपराधिक षड्यंत्र के साथ हिमाचल प्रदेश डिपॉजिटर हित संरक्षण अधिनियम की धारा 5 और अनरजिस्टर्ड डिपॉजिट स्कीम्स (प्रतिबंध) अधिनियम 2019 की धारा 21 और 23 के तहत मुकदमा चल रहा है। यह मामला बड़े क्रिप्टो करंसी फ्रॉड से जुड़ा है। इसमें मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा (जो फिलहाल फरार हैं उसकी दुबई में होने की सूचना है, मिलन गर्ग (मेरठ, यूपी), सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा आदि शामिल हैं।
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आरोप है कि इन लोगों ने वेबसाइट के जरिये लोगों को उच्च रिटर्न का लालच देकर 2019-2022 के बीच बड़ी रकम निवेश करवाई फिर भुगतान रोक दिया। जांच में 80,000 से अधिक निवेशकों को ठगा गया और अरबों रुपये की धोखाधड़ी का अनुमान है। पुलिस ने 70 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है। याचिका में विजय कुमार जुनेजा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के तहत नियमित जमानत के लिए याचिका दायर की थी। उन्होंने दावा किया था कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल हो गई है। किसी भी निवेशक, सह-आरोपी या गिरफ्तार व्यक्ति ने उन्हें फ्रॉड में शामिल नहीं बताया है। नाम केवल फरार मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा के कबूलनामे में संपत्ति पहचान के लिए आया है। उन्होंने याचिका में कहा था कि वह वरिष्ठ नागरिक हैं और दिल की बीमारी, डायबिटीज से पीड़ित हैं। वह आठ सप्ताह के अंतरिम जमानत पर बेहतर इलाज चाहते थे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
विशेष न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे अपराधों में गहरी साजिश और सार्वजनिक धन की हानि होती है, इसलिए अलग दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। याचिकाकर्ता ने पहले भी कई बार जमानत/अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर की गईं, जो विभिन्न अदालतों सत्र न्यायालय, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो चुकी हैं। जेल में आरोपी को आईजीएमसी शिमला से उचित उपचार मिल रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा जांच और ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध करवाई है। मेडिकल आधार पर जमानत देने का कोई कारण नहीं। जमानत दी गई तो फरार होने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निपटारे के लिए हैं और मुकदमे की मेरिट पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह फैसला प्रदेश में चल रहे बड़े क्रिप्टो घोटाले मामले में महत्वपूर्ण है। इस मामले का मुख्य आरोपी अभी भी फरार है।