हिमाचल हाइकोर्ट ने ऊना रेलवे स्टेशन को सील करने के फैसले पर रोक लगा दी है। हिमाचल हाइकोर्ट में न्यायाधीश तरलोक सिंह की पीठ ने यह फैसला सुनाया है। गौर हो कि मंगलवार को ऊना के अतिरिक्त सत्र एंव जिला न्यायाधीश मुकेश बसंल ने 17 साल से मुआवजा न देने पर रेलवे स्टेशन को सील करने के आदेश दिए थे।
इससे पहले सुबह दस बजे कोर्ट के कर्मचारी ऊना रेलवे स्टेशन पहुंचे और करीब दो बजे स्टेशन सील कर दिया। वहीं स्टेशन की चाबी भी किसान परिवारों के सुपुर्द कर दी गई। गौर हो कि कोर्ट ने रेलवे को 2 बजे तक का समय दिया था। मगर उस समय तक न ही रेलवे का अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही मुआवजा राशि किसान परिवार को मिल पाई।
नतीजतन कोर्ट कर्मचारियों ने 10 तालों के साथ ऊना रेलवे स्टेशन को सील कर दिया। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को अतिरिक्त सत्र एंव जिला न्यायाधीश मुकेश बसंल अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए रेलवे स्टेशन पर ताला जड़कर चाबी किसानों के सपुर्द करने के आदेश दिए थे। इसी दौरान रेलवे ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर दी। अब हाइकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया है।
चंद घंटे पहले ही सील हुआ था रेलवे स्टेशन
वहीं हाईकोर्ट का फैसला आने से पहले दोपहर के समय ऊना रेलवे स्टेशन को निचली अदालत के आदेशों के तहत सील करने के लिए कोर्ट कर्मी मौके पर पहुंचे थे। सुबह करीब 10 बजे वेलिफ सहित प्रभावित किसान परिवार रेलवे स्टेशन कोर्ट आर्डर की कॉपी लेकर कब्जा लेने पहुंचे।
मगर स्टेशन मास्टर मौके पर मौजूद नहीं थे। सूचना मिली कि वह करीब डेढ़ बजे कार्यालय पहुंचेंगे। बाद में कर्मचारियों ने अदालत आदेशों की कॉपी रेलवे कर्मियों के सुपुर्द कर रेलवे स्टेशन के कमरों को सील कर दिया।
रेलवे स्टेशन के साथ साथ टिकट घर और स्टेशन मास्टर रूम भी सील किया गया। इससे ऊना अंब तलवाड़ा रेलवे ट्रैक पर चलने वाली सभी ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप्प हो गई। मगर हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब इनकी आवाजाही जल्द ही सुचारू हो सकती है।
17 वर्षों से मुआवजे के लिए भटक रहा कमला देवी का परिवार
ऊना अंब तलवाड़ा रेलवे ट्रैक के लिए कमला देवी और इसके परिवार ने वर्ष 1998 में 16 कनाल भूमि दी थी। जमीन के एवज में कमला देवी और इनके परिवार को 20 लाख 83, 563 रूपए मुआवजा देने के आदेश दिए थे।
मगर वर्षों तक रेलवे विभाग के दफ्तर के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें एक रूपया मुआवजा राशि नहीं मिली। थक हारकर कमला देवी और उनके परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और आखिरकार उन्हें न्याय मिला। कमला देवी और उनका परिवार अदालत के इन आदेशों से काफी खुश है।
मगर अब ताजा फैसले के बाद रेलवे स्टेशन का कब्जा फिलहाल उनके पास नहीं होगा।
ये ट्रेनें होने वाली थी बंद
ऊना रेलवे स्टेशन के सील होने से इस रूट पर चलने वाली करीब पांच ट्रेनों की रफ्तारी पर पूरी तरह से ब्रैक लगने वाली थी। वहीं हिमाचल से दिल्ली, अंबाला आने जाने वाले हजारों लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़नी थी।
ये ट्रेनें होने वाली थी बंद
जनशताब्दी एक्सप्रैस
डीएमयू
हिमाचल एक्सप्रैस
लोकल पैसेंजर
नांदेड़ एक्सप्रैस
जनशताब्दी एक्सप्रैस को जब्त करने के भी दे चुके हैं आदेश
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकेश बंसल की अदालत ने इससे पूर्व दो किसानों के मुआवजा संबंधित मामले की सुनवाई में न केवल उत्तरी रेलवे के गैर जिम्मेदाराना रवैये पर फटकार लगाई गई थी बल्कि अदालत जनशताब्दी एक्सप्रैस को ट्रेन को रोककर किसानों के हवाले करने के आदेश भी दिए थे।
अदालत की इसी सख्ती के बाद रेलवे विभाग ने प्रभावित किसान मेला राम और मदन लाल को 17 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद मुआवजा राशि दी थी। दोनों को 35 लाख रूपए मुआवजा अब मिल चुका है। इससे संबंधित चैक रेलवे विभाग कोर्ट के समक्ष जमा करवा चुका है। अदालत की इस सख्ती की वजह से ही अब लोगों में न्याय प्रणाली के प्रति विश्वास और अधिक बढ़ गया है।