उच्च न्यायालय ने नेरचौक मंडी अस्पताल परिसर में भोजनालय खोलने के लिए शुरू की गई टेंडर प्रक्रिया के तहत वित्तीय स्थिति संबंधी शर्त को सही ठहराया है।
सरकार ने निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के लिए लाल बहादुर शास्त्री गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हास्पिटल नेरचौक, मंडी के कैटरिंग कार्य के लिए तीन वर्षों में कम से कम 5 करोड़ रुपये की टर्न ओवर शर्त लगाई है।
सरकार की ओर से वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया था कि इस अस्पताल में भर्ती किए जाने वाले मरीजों के लिए बिस्तरों की संख्या 500 के लगभग है। यह जल्द बढ़ाकर 750 कर दी जाएगी।
मरीजों व तीमारदारों को सही व स्वस्थ खाना मुहैया करवाने का जिम्मा सरकार का है। इसी कारण सरकार द्वारा निविदा में भाग लेने वाले सरकारी ठेकेदार की वित्तीय क्षमता वाली शर्त कानूनन न्यायोचित है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट किया कि वर्तमान में लाल बहादुर शास्त्री गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज व अस्पताल मंडी में मरीजों के लिए उपलब्ध बिस्तरों की क्षमता के दृष्टिगत टेंडर नोटिस में लगाई शर्त को कानूनी तौर पर गलत नहीं ठहराया जा सकता है।
जिन्हें 500 बिस्तर के अस्पताल में मरीजों के लिए खाना परोसने का अनुभव नहीं है। इस तरह के ठेकेदारों को निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाना न्यायोचित नहीं होगा। प्रार्थी ने टेंडर नोटिस को याचिका के माध्यम से हाई कोर्ट के समक्ष चुनौती दे रखी थी।