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Shimla News: सड़क हादसे में युवक की मौत पर परिजनों को 18.95 लाख मुआवजा

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2024 में तेज रफ्तार से गाड़ी गिरने से हुई थी युवक की मौत
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रुचि सांख्यान
शिमला। सड़क दुर्घटना में 23 वर्षीय युवक की मौत के मामले में शिमला की मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी-III) अदालत ने परिजनों के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने पीड़ित परिवार को 18,94,700 रुपये का मुआवजा 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। यह राशि याचिका दायर करने की तिथि से वास्तविक भुगतान तक देय होगी। न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी अजय मेहता की अदालत ने बीमा कंपनी (नेशनल इंश्योरेंस कंपनी) को आदेश दिए हैं कि वह यह राशि 30 दिनों के भीतर अदा करे। मामले के अनुसार, 12 मार्च 2024 को ठियोग तहसील के गांव करियाल निवासी सचिन अपनी साइट से काम निपटाकर गाड़ी में घर लौट रहे थे। वे जब कुमारसैन तहसील के तहत कंगल पहुंचे तो चालक संदीप की तेज व लापरवाही भरी ड्राइविंग के कारण कार अनियंत्रित होकर सड़क से करीब 60-70 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में सचिन की मौके पर ही मौत हो गई। इस संबंध में पुलिस थाना कुमारसैन में चालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 279, 337 व 304 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
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मृतक की मां भावना देवी, बहन अनीता देवी और छोटे भाई रवि वर्मा ने याचिका दायर कर 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की। परिजनों का कहना था कि सचिन सरकारी आईटीआई ठियोग से प्रशिक्षित फिटर-कम-इलेक्ट्रीशियन था और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। अदालत ने पाया कि मृतक कुशल कामगार था। प्रदेश सरकार की न्यूनतम दैनिक मजदूरी संरचना और सर्वोच्च न्यायालय के प्रणय सेठ व सरला वर्मा फैसलों के दिशा-निर्देशों के आधार पर 40 प्रतिशत भविष्य की संभावनाएं जोड़ते हुए तथा 18 का मल्टीप्लायर लगाकर कुल मुआवजा तय किया गया। इसमें निर्भरता क्षति के अलावा 44,000 रुपये कंसोर्टियम और 36,300 रुपये दाह संस्कार व एस्टेट क्षति के शामिल हैं। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मुआवजे की कुल राशि में से मृतक की मां को 50 प्रतिशत तथा बहन और छोटे भाई को 25-25 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। साथ ही यह निर्देश भी दिया गया कि राशि जमा होने के बाद इसे दो वर्ष के लिए किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर के रूप में रखा जाएगा। बीमा कंपनी की ओर से चालक का लाइसेंस व अन्य दस्तावेज अवैध होने की दलीलों को अदालत ने खारिज कर दिया।
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