सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग शिमला स्थित प्रदेश मुख्यालय में सेवारत एक महिला जूनियर इंजीनियर की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश हमीरपुर की अदालत में खारिज हो गई है। जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अब जेई पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
पूर्व में हमीरपुर में सेवारत होने के दौरान संबंधित जेई के खिलाफ हमीरपुर जिला की दो पेयजल स्कीमों में बिजली वायरिंग के कार्य में धांधली के आरोप हैं। बिजली बोर्ड और आईपीएच ने इस मामले की जांच में संबंधित जेई के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत पाए थे। जिसके बाद राज्य सतकर्ता एवं भ्रष्टाचार ब्यूरो ने भी इस मामले की जांच की थी।
विजिलेंस ने भी आरोपों को सही पाया था। जिसके बाद विजिलेंस ने आईपीएच की जेई के खिलाफ भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए संबंधित जेई ने हमीरपुर न्यायालय में जमानत की अर्जी लगाई थी।
जिसे सोमवार को विशेष न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। बता दें कि वर्ष 2014-15 में हमीरपुर जिला की भारी-भलेहड़ा पेयजल स्कीम में बिजली वायरिंग के कार्य के लिए 1.03 लाख रुपये में टेंडर और ओवरहेड टैंक लंबलू में वायरिंग के लिए 25 हजार रुपये का टेंडर आईपीएच विभाग ने आवंटित किया था।
इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए डुगली पंचायत के प्रधान ओम प्रकाश ने विजिलेंस और आईपीएच विभाग में शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि इन दोनों पेयजल स्कीमों पर महज 42 से 25 हजार रुपये ही खर्च हुआ है।
इस पर जेई के खिलाफ विजिलेंस ने पीसी एक्ट में मामला दर्ज किया। उधर, डीएसपी विजिलेंस हमीरपुर बीडी भाटिया ने कहा कि आईपीएच विभाग की जेई ने जमानत की अर्जी हमीरपुर न्यायालय में दी थी जो सोमवार को खारिज हो गई है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही आरोपी जेई को गिरफ्तार किया जाएगा।