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Shimla News: बारिश से मकान के नुकसान पर बीमा कंपनियों को 57.3 लाख चुकाने का आदेश

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आयोग ने फ्यूचर जनरली और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस की मनमानी पर लगाई रोक
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अनुचित तरीके से क्लेम खारिज करने पर लगाई फटकार
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने मकान मालिक को भारी बारिश से हुए नुकसान का मुआवजा न देने पर बीमा कंपनियों को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने फ्यूचर जनरली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस को सेवा में कोताही का दोषी मानते हुए कुल 57,03,965 रुपये को आनुपातिक रूप से (कंट्रीब्यूशन) चुकाने का आदेश दिया है।
शिकायतकर्ता प्यारे लाल चौहान जो कि शिमला जिले के ननखड़ी तहसील के निवासी हैं, उन्होंने अपने तीन मंजिला मकान के निर्माण के लिए यूको बैंक से लोन लिया था। बैंक की ओर से लोन की सुरक्षा के लिए मकान का बीमा फ्यूचर जनरली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से 45 लाख रुपये का करवाया गया था। इसके बाद मकान की वास्तविक कीमत एक करोड़ से अधिक होने के कारण शिकायतकर्ता ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस (पॉलिसी बाजार के माध्यम से) से भारत गृह रक्षा पॉलिसी के तहत 99,99,996 रुपये का और बीमाकृत करवा लिया था।
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18 जुलाई 2023 को भारी बारिश के कारण शिकायतकर्ता के मकान को भारी क्षति पहुंची और वह रहने लायक नहीं रहा। इस घटना की सूचना तुरंत ग्राम पंचायत प्रधान, तहसीलदार और संबंधित बीमा कंपनियों को दी गई। फ्यूचर जनरली इंश्योरेंस कंपनी ने दस्तावेजों की कमी का हवाला देकर बिना किसी ठोस आधार के शिकायतकर्ता के क्लेम को नो क्लेम कर बंद कर दिया था। इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम एक कल्याणकारी कानून है और बीमा कंपनियां तकनीकी आधार पर या तुच्छ कारणों से सही क्लेम को खारिज नहीं कर सकतीं।
एसबीआई जनरल इंश्योरेंस ने यह कहकर क्लेम खारिज कर दिया था कि नुकसान 18 जुलाई को नहीं बल्कि पॉलिसी शुरू होने से एक दिन पहले यानी 11 जुलाई 2023 को हुआ था।
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि व्हाट्सएप चैट के स्क्रीन शॉट के अलावा कंपनी के पास इस बात का कोई ठोस और भरोसेमंद सबूत नहीं था कि नुकसान 11 जुलाई को हुआ था। आयोग ने यह भी माना कि पॉलिसी बाजार के जरिए भरे गए फार्म में यदि कोई कॉलम खाली भी रह गया था तो इसे बीमा कंपनी की मंजूरी के बाद ही पॉलिसी जारी हुई थी इसलिए अब इसे छुपाना नहीं कहा जा सकता।
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जिला आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सर्वेक्षक (सर्वेयर) की रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन करने के बाद आदेश दिया कि बीमा कंपनियां कुल 57,03,965 रुपये की राशि शिकायतकर्ता को देंगी। इस राशि में से 31.03 फीसदी यानी 17,69,940 रुपये फ्यूचर जनरली इंश्योरेंस कंपनी और 68.97 फीसदी यानी 39,34,025 रुपये एसबीआई जनरल इंश्योरेंस द्वारा भुगतान किया जाएगा। यह राशि शिकायत के दायर होने की तारीख से लेकर भुगतान तक 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ चुकानी होगी। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 50,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 25,000 रुपये भी दोनों कंपनियों द्वारा समान अनुपात में 45 दिनों के भीतर देय होंगे। यूको बैंक के खिलाफ दायर शिकायत को आयोग ने खारिज कर दिया।
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