साल 2017 में ठियोग का मामला, तीन महीने में मोबाइल में हैंग होने और अपने आप बंद हो जाने की आने लगी थी समस्या
मोबाइल विक्रेता को मानसिक उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च देने के भी आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला उपभोक्ता आयोग ने वारंटी अवधि के भीतर खराब मोबाइल फोन न बदलने और मरम्मत न करने पर ठियोग के एक मोबाइल विक्रेता (दुकानदार) पर 45,900 रुपये का जुर्माना ठोका है। आयोग ने विक्रेता को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ताओं को 5,900 (मोबाइल की कीमत) के साथ मानसिक उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 40,000 रुपये का भुगतान करे। साथ ही आयोग ने निर्देश दिया कि दुकानदार, शिकायतकर्ताओं से संबंधित मोबाइल सेट कब्जे में ले और आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर अनुपालन सुनिश्चित करे।
शिकायतकर्ता प्रियंजल और जीत सिंह ने 25 जनवरी 2017 को ठियोग बस स्टैंड स्थित श्याम लाल मोबाइल शॉप से 5,900 रुपये में एलवाईएफ ब्रांड का मोबाइल खरीदा था। दुकानदार ने मोबाइल को विश्वसनीय और एक वर्ष की वारंटी वाला बताया था। लेकिन, तीन महीने के उपयोग के बाद हैंग और अपने आप बंद (चार्जिंग) हो जाने की समस्या आने लगी। शिकायतकर्ताओं ने 1 अगस्त 2017 को दुकानदार को मोबाइल मरम्मत के लिए सौंपा। दुकानदार ने कहा कि सेट कंपनी को भेजा जाएगा, लेकिन कई दिन बाद मोबाइल बिना मरम्मत के लौटा दिया गया। तर्क दिया कि मोबाइल पहले किसी अन्य दुकान पर खोला (मरम्मत) गया था, इसलिए वारंटी रद्द हो गई थी। समस्या का समाधान न होने पर शिकायतकर्ताओं ने विक्रेता को कानूनी नोटिस दिया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 12 के तहत आयोग में शिकायत दायर की।
मरम्मत या बदलाव का निर्देश देना व्यावहारिक नहीं : आयोग
आयोग ने कहा कि दुकानदार का रुख विरोधाभासी रहा। कानूनी नोटिस और शिकायत के जवाब में अलग-अलग बातें कही गईं। दुकानदार यह साबित नहीं कर सका कि मोबाइल वास्तव में किसी अन्य दुकान पर खोला गया था। आयोग ने माना कि वारंटी अवधि में सेवा न देना उपभोक्ता अधिकारों का हनन है। चूंकि अब मोबाइल पुराना हो चुका है, इसलिए मरम्मत या बदलाव का निर्देश देना व्यावहारिक नहीं होगा।