जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 1.24 लाख देने के दिए आदेश, कंपनी ने दावे को किया था खारिज
साल 2016-17 में कोटखाई में ओलावृष्टि से सेब के पेड़ और फसल को हुआ था नुकसान
आयोग ने माना, तकनीकी आधार पर दावे का निपटारा न करना अनुचित व्यापार
दीपक मेहता
शिमला। करीब आठ साल बाद जिला के उपमंडल कोटखाई के सेब बागवान को उपभोक्ता आयोग ने बड़ी राहत दी है। आयोग ने भारतीय कृषि बीमा कंपनी लिमिटेड को सेब की फसल के नुकसान के लिए शिकायतकर्ता को 1,24,500 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। मामला साल 2016-17 की ओलावृष्टि से जुड़े सेब के पेड़ों और फसल के नुकसान का है। नुकसान के बावजूद बीमा कंपनी ने तकनीकी आधार पर दावे को खारिज कर दिया था। इससे परेशान होकर किसान ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ता मोहिंदर सिंह चौहान ने आर-डब्ल्यूबीसीआईएस (पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना) के तहत 18,500 रुपये का प्रीमियम देकर सेब के पेड़ों और फसल का बीमा कराया था। वर्ष 2017 के दौरान भारी ओलावृष्टि के कारण उनके सहित क्षेत्र के किसानों को अपने सेब के पेड़ों और फसल को भारी नुकसान हुआ था। नुकसान के बाद उन्होंने बागवानी विभाग के माध्यम से भारतीय कृषि बीमा कंपनी लिमिटेड (बीमा कंपनी) को उचित दस्तावेज प्रस्तुत किए। नुकसान का आकलन 84,500 रुपये किया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहकर दावा खारिज कर दिया कि हानि सूचना और फसल हानि सूचना प्रपत्र पर उनके हस्ताक्षर प्रस्ताव प्रपत्र से मेल नहीं खाते। उधर, जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह ने शिकायत स्वीकार करते हुए माना कि किसान नुकसान की भरपाई का हकदार है। तकनीकी आधार पर दावे का निपटारा न करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने भारतीय कृषि बीमा कंपनी लिमिटेड को 84,500 रुपये का बीमा दावा सहित 25,000 रुपये मानसिक पीड़ा और 15,000 रुपये मुकदमेबाजी व्यय भुगतान करने का आदेश दिया है। निर्देश दिया है कि वे शिकायतकर्ता के दावे का निपटारा 30 दिनों के भीतर करें। आयोग ने इस फैसले को किसानों के हित में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि किसानों के नुकसान की अनदेखी नहीं की जा सकती।