सत्र न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रखा बरकरारसाल, 2013 में दोषी ने सब्जी मंडी की फर्म से उधार ली थी माल की आपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। चेक बाउंस मामले में शिमला शहर के एक व्यक्ति को छह महीने का कारावास और 40 हजार रुपये का जुर्माना भरने की सजा भुगतनी होगी। अपीलकर्ता/दोषी सुमित ग्रोवर ने 19 जनवरी, 2024 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ट्रायल कोर्ट) के फैसले और सजा के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (सीबीआई) डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने अपील को खारिज करते हुए ट्रायल के दोष सिद्ध के निर्णय और सजा के आदेश को बरकरार रखते हुए यह फैसला सुनाया है। साथ ही दोषी को 30 दिनों की अवधि के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने के भी आदेश दिए हैं।
यह मामला 4 सितंबर, 2013 में शहर के सब्जी मंडी क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता मेसर्स महेश दूरदर्शन फर्म ने आरोप लगाए थे कि आरोपी ने माल की आपूर्ति उधार ली थी। बदले में फर्म के पक्ष में 30,000 रुपये की राशि का चेक जारी किया था। उपरोक्त चेक को एसबीआई बैंक के समक्ष भुनाने के लिए प्रस्तुत किया था, लेकिन 24 दिसंबर, 2013 को आरोपी के बैंक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण चेक अस्वीकृत कर दिया गया। कानूनी नोटिस के बावजूद भी सुमित भुगतान करने में विफल रहा। इसके बाद 18 जनवरी, 2014 को कर्ज न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने अदालत के समक्ष केस दायर किया था। इसी दौरान दोषी ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे की मांग की। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर से दलीलें दी गई और सबूतों के आधार पर सुमित ग्रोवर को छह महीने की सजा और 40 हजार रुपये का मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोषी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती थी दी थी। अब सत्र न्यायालय ने भी दोषी सुमित ग्रोवर को ट्रायल कोर्ट की ओर से पारित सजा के निर्णय को सही ठहराया है। संवाद