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Shimla News: पति की सड़क हादसे में मौत पर पत्नी और बच्चों को मिलेगा 19 लाख मुआवजा

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न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने सुनाया फैसला
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प्रतिवादी को 30 दिन के भीतर मुआवजे की राशि के भुगतान के आदेश
साल 2012 में शिमला ग्रामीण के सुन्नी क्षेत्र का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अदालत ने सड़क दुर्घटना में व्यक्ति की मौत पर आश्रितों को 19 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। सत्र न्यायाधीश दविंदर कुमार (मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण) की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने प्रतिवादी न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (बीमाकर्ता) को याचिका दायर करने की तारीख से प्रति वर्ष 8 प्रतिवर्ष ब्याज के साथ दावेदार को भुगतान करने के आदेश दिए हैं। निर्देश दिए हैं कि 30 दिन के भीतर दावेदार को मुआवजे की राशि का भुगतान करें। साल 2012 में पवन की वाहन दुर्घटना में मौत हो गई थी। वह पेशे से एक ठेकेदार थे। एमएसीटी ने दायर याचिका में फैसला सुनाते हुए मृतक के परिवार को 19,06,000 रुपये मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं। मुआवजे की राशि जमा करने पर इसे याचिकाकर्ता के बीच 50: 25: 25 के अनुपात में विभाजित किया जाएगा।
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यह मामला 26 अप्रैल 2012 को शिमला ग्रामीण के सुन्नी क्षेत्र का है। उप तहसील धामी निवासी पवन वाहन में धामी से मांदरी की ओर जा रहे थे। महापुना नामक जगह पर वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके कारण उसकी मौके पर की मौत हो गई। बालूगंज थाना पुलिस ने मामला पंजीकृत किया था। इसके बाद मृतक की पत्नी कल्पना ने एमएसीटी न्यायालय में उचित मुआवजे को लेकर याचिका दाखिल की। अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ताओं को 2013 से उस राशि से वंचित रखा गया था जिसके वे हकदार थे। साथ ही संबंधित वाहन का बीमा प्रतिवादी कंपनी के पास था, इसलिए बीमाकर्ता होने के नाते याचिकाकर्ताओं को क्षतिपूर्ति देने के लिए उत्तरदायी है। निर्देश दिए है कि याचिका दायर करने की तिथि से लेकर मुआवजा राशि की वसूली तक 8 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित 19,06,000 की मुआवजा राशि जमा कराएं।
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