विधानसभा चुनाव की 18 दिसंबर को होने वाली मतगणना के दौरान पहली बार वीवीपैट मशीन के भीतर पड़ी पर्चियों की गिनती भी होगी। प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से केवल एक-एक वीवीपैट मशीन की गिनती होगी।
वीवीपैट(वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) का चयन लक्की ड्रॉ से होगा। अगर वीवीपैट में मतों की संख्या और ईवीएम में मतों की संख्या में कोई फर्क नजर आया तो चुनाव आयोग सख्त कदम उठा सकता है।
इससे पहले वीवीपैट मशीन के भीतर पड़ी पर्चियों की गिनती केवल किसी प्रत्याशी के दावे पर ही किए जाने का प्रावधान था। बीते वर्ष उत्तरप्रदेश में हुए मतदान के बाद कई राजनीतिक दलों के नेता ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठा चुके हैं।
अब चुनाव आयोग ने और अधिक राहत देते हुए हर विधानसभा क्षेत्र से एक वीवीपैट की गिनती करवाने की सहूलियत भी दी है। प्रदेश में पहली बार भोरंज विधानसभा सीट के लिए अप्रैल में हुए उपचुनाव में वीवीपैट का प्रयोग कुछेक मतदान केंद्रों पर हुआ था।