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Shimla News: त्योहारी सीजन के जश्न में डूबे पार्षद, सदन में सवाल लगाना भूल गए

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कांग्रेस समेत किसी विपक्षी पार्षद ने भी वार्डाें के कार्यों को लेकर नहीं लगाया सवाल, सिर्फ प्रस्तावों पर होगी चर्चा
सात साल में दूसरी बार बिना सवाल के होगा एमसी का सदन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। त्योहारी सीजन के जश्न में डूबे नगर निगम के पार्षद इस बार सदन में सवाल लगाना ही भूल गए। अपने कार्यों को लेकर हर बैठक में हंगामा पीटने वाले पार्षदों ने इस बार नगर निगम सदन के लिए एक भी सवाल नहीं लगाया है। ऐसे में सदन में इस बार सिर्फ प्रशासन की ओर से पेश होने वाले प्रस्तावों पर चर्चा होगी।

कांग्रेस शासित नगर निगम के ढाई साल के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब सदन में एक भी पार्षद ने अपने कामों को लेकर सवाल नहीं लगाया है। साढ़े सात साल में ऐसा दूसरी बार होने जा रहा है। पिछली भाजपा शासित नगर निगम के पांच साल के कार्यकाल के दौरान सिर्फ एक बार ही बिना किसी सवाल का जवाब दिए सदन हो गया था। आमतौर पर जनहित से जुड़े कामों को लेकर सदन में सवाल पूछे जाते हैं। यह सवाल वार्डाें में होने वाले नए कामों, अटके हुए कामों का कारण जानने, उसकी स्टेट्स रिपोर्ट, निगम की ओर से उन पर की गई कार्रवाई पता करने से संबंधित होते हैं। सदन से दस दिन पहले यह सवाल नगर निगम को भेजने अनिवार्य है। इसका फायदा यह है कि इन सवालों का नगर निगम सदन में लिखित जवाब प्रशासन को देना पड़ता है। पिछले ढाई साल के कार्यकाल पर नजर डालें तो हर सदन में 10 से ज्यादा पार्षद सवाल पूछते रहे हैं लेकिन इस बार एक ने भी जहमत नहीं उठाई है। कुछेक भाजपा पार्षदों ने सवाल तैयार किए थे लेकिन सदन के लिए भेजने में देरी हो गई।
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पानी, सफाई पर जवाब चाहती है जनता
शहर की जनता पेयजल आपूर्ति से परेशान हैं। परियोजनाओं में पर्याप्त पानी होने के बावजूद शहर में तीसरे दिन पानी आ रहा है। यह राशनिंग कब खत्म होगी, इस पर कोई पार्षद सवाल नहीं उठा रहा। शहर के कई वार्डाें में सफाई व्यवस्था ठप है। सड़कें खस्ताहाल हैं। कई सड़कें बंद पड़ी हैं। इनकी बहाली के काम या तो सुस्त हैं या फिर शुरू ही नहीं हो रहे हैं। नगर निगम में बिना किसी कारण टेंडर भी रद्द हो रहे हैं। पार्षद दबी आवाज में तो सवाल उठा रहे हैं लेकिन सदन में इसके लिए सवाल नहीं भेज रहे।
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