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ब्लड बैंकिंग चलाने काउंसिल ठप : श्रीवास्तव

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बोले-आठ साल से न बैठक हुई, न किया पुनर्गठन
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अस्तपालों में खून की कमी से जूझ रहे मरीज
सीएम से कदम उठाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। ब्लड बैंकिंग की व्यवस्था चलाने वाली राज्य ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ठप है। इसका पुनर्गठन तक नहीं हुआ है। आठ साल से एक भी बैठक नहीं हुई है। यह जानकारी उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने प्रेसवार्ता में दी।
उन्होंने कहा कि राज्यों में स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ब्लड बैंकों से संबंधित योजनाओं, उनके संचालन और आवश्यकताओं की पूर्ति का काम करती है। ब्लड बैंकिंग व्यवस्था अब गंभीर रूप से बीमार है। श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग खुद सुप्रीम कोर्ट के आदेश और संबंधित नियम-कानून की खुले आम धज्जियां उड़ा रहा है। अफसरशाही की कोताही का नतीजा है कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर ब्लड बैंकिंग व्यवस्था चलाने के लिए स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में बनी राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल वर्षों से ठप है। इस वजह से रोगियों को समय पर रक्त नहीं मिलता। वहीं ब्लड बैंकों में डॉक्टर, नर्स, तक्नीशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटर, ड्राइवर समेत अन्य संसाधनों की कमी है।
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उन्होंने कहा कि आईजीएमसी समेत सभी प्रमुख ब्लड बैंकों में स्टाफ और उपकरणों की कमी है। इस कारण से केंद्र सरकार द्वारा 100 फीसदी कंपोनेंट बनाने का काम पूरा नहीं हो पा रहा है। इस वजह से रक्त की कमी रहती है। एक यूनिट रक्त से कम से कम तीन कंपोनेंट प्लाज्मा, प्लेटलेट और आरबीसी बनाकर तीन मरीजों को चढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा प्रदेश में एफ्रेसिस मशीन किसी भी ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस मशीन से रक्तदाता का सिर्फ आवश्यक कॉम्पोनेंट दान में लिया जाता है और बाकी रक्त शरीर में फिर से चला जाता है। अजय श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले में तुरंत कदम उठाने की मांग की।
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