आचार संहिता से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिलासपुर रैली से भाजपा को चुनावी मंत्र दे गए। खुद को हिमाचल से जोड़कर मोदी ने मतदाताओं की नब्ज टटोली। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार ही प्रदेश का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है और निशाने पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह रहेंगे।
हर सेक्टर में रोजगार की बात कर उन्होंने तय किया कि टारगेट वोटर ग्रुप 35 वर्ष से नीचे वाला युवा ही है। फौजी वोट बैंक के लिए ओआरओपी और सर्जिकल स्ट्राइक का कार्ड भाजपा का बड़ा हथियार साबित होगा। महिला वोट बैंक के लिए उज्ज्वला और प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना का दांव चला जाएगा।
नोटबंदी से गिरती अर्थव्यवस्था के आरोपों का जवाब भी मोदी ने दिया है, जिसे पार्टी चुनावों में इस्तेमाल करेगी। रैली में उमड़े जन सैलाब से यह संकेत मिला कि यूपी और उत्तराखंड में चली लहर अब हिमाचल की दहलीज पर पहुंच गई है।
प्रधानमंत्री के बिलासपुर में चालीस मिनट लंबे संबोधन से साफ हो गया है कि भाजपा ने हिमाचल के लिए अपनी चुनावी रणनीति नहीं बदली है। उत्तर भारतीय राज्यों में पार्टी अब तक सफल रही रणनीति को आगे बढ़ाएगी। पीएम ने वन रैंक वन पेंशन, इंद्रधनुष, उज्ज्वला, सर्जिकल स्ट्राइक, केंद्र पोषित योजनाओं और स्वच्छता अभियान पर फोकस रखा।
इन्हीं पर पार्टी अपना प्रचार अभियान आगे बढ़ाएगी। उन्होंने सीधे तौर पर वीरभद्र पर निशाना साध कर भ्रष्टाचार के मुद्दे को छुआ। सोनिया और राहुल गांधी के बहाने मुख्यमंत्री वीरभद्र को भ्रष्टाचारियों की कतार में खड़ा कर गए।
भ्रष्टाचार पर उनका हमला पूरी कांग्रेस पर हुआ जबकि वे यह श्रेय लेने से भी नहीं चूके कि साढ़े तीन साल में उनकी सरकार में एक भी भ्रष्टाचार का मामला सामने नहीं आया है। भाजपा को मिले इस मोदी मंत्र की काट कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगी।
अब यह रोचक रहेगा कि मोदी के जमानत पर सरकार के दांव की काट अब कांग्रेस क्या निकालती है। केंद्र की फंडिंग से लेकर केंद्र की तमाम योजनाओं की सफलता को विफलता में बदलने की रणनीति पर भी कांग्रेसी रणनीतिकारों को माथापच्ची करनी होगी।