वीरभद्र सरकार के कार्यकाल में साल 2013 में विजिलेंस ब्यूरो ने कपूर के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप था कि उन्होंने विवेकाधिकार कोटे का दुरुपयोग कर पत्नी एवं चहेतों को प्लॉट बांट दिए।
मामला दर्ज होने के बाद से पांच साल तक विजिलेंस ब्यूरो किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सका। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद जयराम सरकार में किशन कपूर खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री बने। जांच पूरी कर हाल ही में विजिलेंस ने उनके खिलाफ दर्ज मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो जांच में यह बात तो सामने आई थी कि कपूर ने पत्नी के नाम पर एक बड़ा प्लाट आवंटित कर दिया। लेकिन विवाद होने के बाद कपूर ने इसे सरकार को सरेंडर कर दिया था। ऐसे में उनके खिलाफ मामला नहीं बनता। इस बात को आधार बनाते हुए ब्यूरो ने जांच बंद कर दी है।