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कोरोना: दो बसों के चालकों-परिचालकों ने भूखे पेट काटी रात, नेरवा में रात को ही लौट आईं बसें

Tue, 02 Jun 2020 07:06 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, बैजनाथ (कांगड़ा)
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पुराना बस अड्डा शिमला में बसें - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना का डर लोगों के दिल से आसानी से उतरता हुआ नजर नहीं आ रहा है। हिमाचल सरकार ने भले ही लॉकडाउन में ढील देकर आम जनजीवन को पटरी पर लाने की कवायद शुरू कर दी है, लेकिन दूसरे दिन भी परिवहन निगम की बसों में सवारियों का टोटा ही रहा।  लोगों में कोराना का डर इस कदर हावी है कि सोमवार दोपहर बाद मंडी जिला के जोगिंद्रनगर जाने वाली दो बसों का रात्रि ठहराव गांव में होने पर इन बसों के चालकों और परिचालकों को खाना तक नसीब नहीं हो सका। जोगिंद्रनगर के एक पंचायत प्रधान ने तो साफ कह दिया कि उन्हें बसों की आवश्यकता नहीं है और इससे गांव स्तर पर यह बीमारी फैलेगी। परिवहन के बैजनाथ डिपो के तहत सोमवार को पांच दर्जन से अधिक रूटों पर बसें दौड़ाई गई थीं।

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सोमवार को निगम के पास पूरे दिन में करीब 25 हजार के करीब कैश जमा हो सका है। इसमें पठानकोट रूट पर जसूर तक जाने वाली तीन बसों का करीब छह हजार रुपये कैश शामिल रहा है। हालांकि, सोमवार के मुकाबले मंगलवार को बसों में सवारियों की संख्या में कुछ हद तक बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अब भी लोग बसों में सफर करने से परहेज कर रहे हैं। दोपहर दो बजे के बाद बाजारों के खुले रहने के बावजूद बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। यही नहीं, कुछेक दुकानदार भी दो बजे के बाद दुकानें बंद कर चले गए। मंगलवार को निगम के तहत बसों की संख्या को कम कर दिया गया और सवारियों की संख्या को देखते हुए आवश्यक रूटों पर ही बसें भेजी गईं।

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चालकों-परिचालकों के ठहरने-खाने की व्यवस्था नहीं

 वहीं, बस सेवाएं शुरू होने से जहां आम आदमी ने राहत की सांस ली है, वहीं कुछ ग्रामीण रूटों पर चालकों और परिचालकों के लिए रात को ठहरने और खाने की व्यवस्था न होने से नेरवा डिपो के चार रूट अस्थायी रूप से स्थगित करने पड़े हैं। सोमवार को नेरवा डिपो के तहत 80 रूटों पर बसें भेजी गईं। इनमें से चार बसें चालक-परिचालकों के लिए सुविधाएं न होने पर रात को ही लौट आईं। भूट-नावी रूट पर गई बस के चालक और परिचालक को उस क्षेत्र के लोगों ने साफ कह दिया कि यह बस 15 दिन तक न चलाई जाए। इसके बाद स्थिति के हिसाब से चालक और परिचालक के लिए रहने और खाने की व्यवस्था होने के बाद ही इसे चलाया जाए। इसी प्रकार नावधार, रानवी और कोटि सरांह रूटों पर गईं बसें भी वहां पर चालकों-परिचालकों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था न होने पर रात को नेरवा लौट आईं। 

इन क्षेत्रों के लोगों ने परिवहन निगम को सूचित कर दिया है कि क्षेत्र के लोग आपस में बैठक कर चालकों-परिचालकों के लिए कोई व्यवस्था करने का इंतजाम करेंगे। इसके बाद ही इन क्षेत्रों को बसें भेजी जाएं। ग्राम पंचायत पुजारली के उपप्रधान यशपाल के अनुरोध पर मंगलवार को नावधार के लिए दिन की समयसारिणी के अनुसार बस भेजी गई जो शाम को नेरवा लौट आई। एचआरटीसी नेरवा डिपो के कार्यवाहक क्षेत्रीय प्रबंधक और मुख्य निरीक्षक रतन शर्मा ने बताया कि चालकों-परिचालकों के लिए रात को रहने और भोजन की व्यवस्था न होने के कारण कुछ रूटों को फिलहाल बंद कर दिया गया है। व्यवस्था होने पर इन्हें पहले की तरह बहाल कर दिया जाएगा। दिन के रूटों पर पूर्व निर्धारित समयसारिणी के अनुसार ही बसें चलती रहेंगी।  
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