हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में औषधीय जड़ी-बूटी कुठ को अब बेहतर दाम मिलेंगे। चीन में कोरोनावायरस के चलते देश की अंतरराष्ट्रीय मंडियों में इसकी सप्लाई पूर्ण रूप से बंद हो गई है। ऐसे में हिमाचल की इस जड़ी-बूटी की कीमत बढ़ेगी। जिला कुल्लू की ही बात करें तो यहां के व्यापारी इस समय लाहौल के कुठ का 40 किलोग्राम का बैग 22 हजार रुपये तक खरीद रहे हैं।
ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश की बड़ी मंडियों में इसकी कितनी मांग बढ़ सकती है। जड़ी-बूटियों के कारोबार से जुड़े कारोबारी चीन की सप्लाई रुक जाने से कुठ के दामों में उछाल आने की बात को स्वीकार रहे हैं। आने वाले दिनों में इसके दामों में और अधिक उछाल आने की संभावना है। गौर रहे कि लाहौल घाटी इस समय बर्फ की आगोश में है, लेकिन यहां के लोगों ने लाहौल और कुल्लू में सैकड़ों टन कुठ को स्टोर किया है।
इसके अंतरराष्ट्रीय मंडियों में उतरते ही बेहतर दाम मिलेंगे। यह जरूर है कि किसानों को इसे बेचने में थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। जड़ी-बूटियों के कारोबार से जुड़े लुधियाना के व्यापारी रामप्रसाद ने कहा कि पहले देशभर की विभिन्न मंडियों में चीन से बड़े पैमाने पर कुठ की सप्लाई आती थी।
ऐसे में हिमाचल के बेहतर गुणवत्ता वाले कुठ को अच्छे दाम नहीं मिलते थे। अंतरराष्ट्रीय मंडियों में व्यापारियों को कम कीमत पर चीन का कुठ मिल जाता था। अब चीन में कोरोनावायरस के बाद सप्लाई रुक जाने से जनजातीय क्षेत्र में उत्पाद को अच्छे दाम मिलेंगे। हिमाचल के एकमात्र लाहौल घाटी में हॉब्स की खेती होती थी।