देश में लॉकडाउन के बाद फार्मा के बाद अब फूड प्रोसेसिंग और पैकेजिंग उद्योगों में उत्पादन को भी केंद्र की मंजूरी मिल गई है। सरकार ने संबंधित उद्योगों को चलाने के लिए जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति करने वाले उद्योगों को भी काम करने की ढील दे दी है। देश के कोने-कोने में कोरोना और अन्य बीमारियों से लड़ने के लिए जरूरी दवाओं की पैकिंग के लिए पैकिंग उद्योगों को खोलाना अनिवार्य हो गया था।
इस कारण केंद्र ने इन उद्योगों को पूरी क्षमता से साथ काम करने को कहा है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है। केंद्र ने अभी तक फार्मा उद्योगों को ही उत्पादन करने की छूट दी थी परंतु अब प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग और पैकिंग उद्योगों में भी उत्पादन करने के लिए मंजूरी दे दी है।
इन दोनों उद्योगों में उत्पादन शुरू होने से प्रदेश के लाखों सेब और अन्य फल उत्पादकों को राहत मिलेगी। प्रदेश में इन दिनों गुठलीदार फलों की फसल तैयार हो रही है। इन फलों की पैकिंग के लिए भी लाखों कार्टन की जरूरत है। इसके अलावा प्रदेश के किसानों और बागवानों के तैयार फल और सब्जियों को फूड प्रोसेसिंग उद्योग में बेचा जा सकेगा।
केंद्र सरकार ने प्रदेश के हजारों मत्स्य पालकों को भी काम करने की दी छूट दी है। ये लोग अपने आर्थिक संसाधन फिर से जुटा पाएंगे। इन दिनों मत्स्य पालक अपनी आमदनी करते हैं। केंद्र के फैसले के बाद इन मत्स्य पालकों ने राहत की सांस ली है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग मनोज कुमार कहते हैं कि फार्मा के बाद प्रदेश में केंद्र सरकार ने पैकिंग, फूड प्रोसेसिंग और इन उद्योगों को कच्चा माल देने वाले उद्योगों को चलाने की मंजूरी दे दी है। इसके अलावा मत्स्य पालक भी अपना काम कर सकेंगे। इन उद्योगों को स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा।