पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध हिमाचल के कांगड़ा जिले की बीड़ बिलिंग घाटी में मार्च-अप्रैल में प्रस्तावित पैराग्लाइडिंग प्री वर्ल्ड कप पर कोरोना वायरस की काली छाया पड़ती दिख रही है। 30 मार्च से पांच अप्रैल तक होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए अब तक 29 देशों के 122 पायलटों ने आवेदन किया है, जबकि 13 पायलटों ने तय फीस भी चुका दी है।
दूसरी और कोरोना प्रभावित देशों चीन, ईरान, कोरिया और इटली के पायलटों और नागरिकों के भारत में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। कोराना के खौफ के चलते देश में मार्च में होने वाले अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई कार्यक्रम भारत सरकार ने रद्द कर दिए हैं। वहीं सरकारी तौर पर कोरोना प्रभावित देशों के नागरिकों के लिए भारत के दरवाजे भी बंद हो गए हैं। ऐसे में मानवीय परिंदों की साहसिक खेल प्रतियोगिता पर भी कोरोना वायरस का ग्रहण लग सकता है।
हालांकि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सबसे अधिक 47 प्रतिभागी भारत के हैं, जबकि दूसरे स्थान पर रूस के 18 पायलट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कोरोना के जन्मदाता चीन से मात्र एक प्रतिभागी है और अमेरिका व कनाडा से तीन तीन, फ्रांस व इंग्लैंड से आधा-आधा दर्जन, नेपाल से पांच, हंगरी और वियतनाम से तीन-तीन, जापान व फिनलैंड से दो-दो व ईरान से पांच प्रतिभागियों ने आवेदन किया है।
चीन, ईरान, कोरिया और इटली पर भारत में प्रवेश पर प्रतिबंध होने के कारण इन देशों के पायलट प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकेंगे। उधर, प्रतियोगिता का जिम्मा संभाल रहे अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान मानली के निदेशक कर्नल नीरज राणा का कहना है कि देश में कोरोना का प्रभाव किसी खेल पर नहीं पड़ा है और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से बाहरी पायलटों का एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग टेस्ट किया जाएगा। प्रतियोगिता का सफल आयोजन होगा।