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कोरोना ने छीन लिया रोजगार, दिहाड़ी लगा रहे पैराग्लाइडिंग पायलट

Tue, 25 May 2021 11:08 AM IST
Krishan Singh राजकुमार सूद, बैजनाथ (कांगड़ा)

सार

बीड़ बिलिंग में पर्यटन व्यवसाय की रीड़ कहे जाने वाले इन पायलटों को लगातार दो वर्षों से आर्थिक तौर पर नुकसान झेलना पड़ा है। कांगड़ा जिले में वर्तमान में 252 पायलट पर्यटन विभाग के पास पंजीकृत हैं। 
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पैराग्लाइडिंग
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विस्तार
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कोरोना के बीच हजारों लोगों का रोजगार छिन गया है। हिमाचल प्रदेश के बीड़ बिलिंग, कुल्लू, धर्मशाला और बिलासपुर में पैराग्लाइडिंग नहीं होने से पायलट बेरोजगार हो गए हैं। कई दिहाड़ी लगाने को मजबूर हैं तो कई खेतीबाड़ी से परिवार चला रहे हैं।  बीड़ बिलिंग में पर्यटन व्यवसाय की रीड़ कहे जाने वाले इन पायलटों को लगातार दो वर्षों से आर्थिक तौर पर नुकसान झेलना पड़ा है। कांगड़ा जिले में वर्तमान में 252 पायलट पर्यटन विभाग के पास पंजीकृत हैं।

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पैराग्लाइडिंग सीजन के समय एक पायलट एक दिन में तीन से चार उड़ानें भरने की क्षमता रखता है। उड़ान में होने वाले सभी प्रकार के खर्चों को मिलाकर एक उड़ान के एक पायलट को दो हजार से अढ़ाई हजार तक मिलते हैं।  इन पायलटों के दम पर ही टैक्सी, होटल तथा अन्य व्यापारियों के व्यवसाय निर्भर करते हैं। इन पायलटों को अब रोजी-रोटी के लिए मेहनत-मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

कुछ पायलटों ने एक समूह बनाकर ठेकेदारी का कार्य शुरू कर दिया है, जबकि कुछ पायलट अपनी खेतीबाड़ी के कार्य में व्यस्त हैं। गत वर्ष भी पायलटों ने लॉकडाउन के दौरान मनरेगा में कार्य किए थे। बीड़ बिलिंग पायलट एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर ने प्रदेश सरकार से घाटी के पायलटों को आर्थिक तौर पर राहत प्रदान करने का आग्रह किया है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश अवरोल का कहना है कि पायलटों को गत दो वर्षों से रोजी-रोटी के लिए मेहनत मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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बीड़ के मनजीत, सुरजीत कुमार, कमल कुमार, सुरेश, गोल्डी, अरुण ने कहा कि सीजन में वह पंद्रह सौ से लेकर तीन हजार रुपये तक प्रतिदिन कमाई कर लेते हैं। कोरोना कर्फ्यू के कारण अब 400-500 रुपये कमाना भी मुश्किल हो गया है।

कुल्लू में भी सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी पैराग्लाइडिंग से चलती है। साहसिक गतिविधियां बंद होने के बाद यहां भी पायलट दिहाड़ी लगाने को मजबूर हैं। कुल्लू में करीब 400 पायलट विभाग के पास पंजीकृत हैं। कोरोना के बीच इनका रोजगार छिन गया है। इसके अलावा बिलासपुर में सोलो पायलटों की संख्या 85 है। 

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