इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला, टांडा मेडिकल कॉलेज और नेरचौक मेडिकल कॉलेज से कोरोना जांच को लिए जा रहे आरटीपीसीआर सैंपलों की रिपोर्ट दो से तीन दिन बाद मिल रही है। इस बीच, टेस्ट करवाने वाले लोग इधर-उधर घूम रहे हैं। अगर उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तब तक वह व्यक्ति संक्रमण कई जगह फैला चुका होता है। ऐसे में गंभीर मरीजों का इलाज कैसे होगा, यह भी बड़ा सवाल है।
आईजीएमसी लैब में दो टेस्ट मशीनें हैं। छोटी मशीन में एक बार में 90 सैंपल और बड़ी मशीन में 200 सैंपल रखे जाते हैं। एक सैंपल को करीब सात घंटे तक मशीन में रखना पड़ता है। ऐसे में दिन में करीब सात से 800 सैंपलों की ही जांच हो पाती है। हर रोज 1500 से अधिक सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं। उधर, सीएमओ कांगड़ा गुरदर्शन गुप्ता ने बताया कि कांगड़ा जिले में आरटीसीपीआर की रिपोर्ट 24 से 48 घंटे के भीतर दी जा रही है।
ऊना जिले में आरटीपीसीआर सैंपलों की रिपोर्ट चौथे दिन मिल रही है। टांडा मेडिकल कॉलेज में एक दिन में 1000 सैंपलों की जांच की सुविधा है। जिले से ही प्रतिदिन 2500 सैंपल भेजे जा रहे हैं। कुल्लू जिले में भी रिपोर्ट तीसरे दिन आ रही है। जिले से भेजे जा रहे सैंपलों की जांच नेरचौक मेडिकल कॉलेज में हो रही है। मंडी जिले में 24 से 48 घंटे के भीतर अधिकांश आरटीपीसीआर की रिपोर्ट मिल रही है। यहां रिपोर्ट में देरी को लेकर किसी तरह की दिक्कत नहीं है। बाहरी राज्यों से सटा कोई भी बॉर्डर मंडी में नहीं हैं। 18 से 44 साल तक के लोगों का पंजीकरण अभी तक नहीं हो पा रहा है।
आरटीपीसीआर सैंपलों की रिपोर्ट के आने में इतना वक्त नहीं लगना चाहिए। इस बारे में तत्काल जिम्मेवार अधिकारियों से बात कर रहे हैं। अगर क्षमता बढ़ाने की भी कहीं जरूरत है तो उस पर भी काम होगा।
- अनिल कुमार खाची, मुख्य सचिव