वीरभद्र सरकार के कार्यकाल में राज्य सहकारी बैंक और कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक में भर्तियों पर खासा विवाद हुआ था। जयराम सरकार ने छह माह बाद मामले में विजिलेंस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।
ब्यूरो ने तय नियम के अनुसार प्रारंभिक जांच शुरू की, लेकिन इस बीच केंद्र ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में कुछ ऐसे संशोधन कर दिए जिससे भर्ती घोटाले में फंसने वाले अफसरों को फायदा मिल सकता है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार जांच के पक्षधर अफसरों का मानना है कि विजिलेंस अधिकारी जानबूझकर जांच में देरी कर रहे हैं, ताकि नए संशोधन से आरोपी अफसरों को फायदा मिल सके।
यही वजह है कि अब शासन ने जांच में ढील बरतने वाले अफसरों के खिलाफ ही जांच का मन बना लिया है। मामले में मुख्य सचिव से लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह और प्रधान सचिव सहकारिता से संपर्क किया, लेकिन सभी ने इस पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
विजिलेंस मैनुअल में बिना प्रारंभिक जांच के सीधे एफआईआर का प्रावधान ही नहीं है। विजिलेंस ने पहले प्रारंभिक जांच शुरू कर दी। अब विभिन्न बैंकों से दस्तावेज लेकर मामला दर्ज करने की वजह बताने में समय लग रहा है। जानकारों का कहना है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर ही शासन मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश देगा।