ऐसे में अपील को दायर करने में 166 दिनों की देरी हुई है जिसे माफ किया जाए। हाईकोर्ट ने आवेदन की प्रारंभिक सुनवाई के बाद प्रतिवादी को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया। प्रतिवादी ने अपने जवाब में कहा कि अपीलार्थी द्वारा अदालत के समक्ष झूठा शपथ पत्र दायर किया है।
जिला अदालत के निर्णय को चुनौती दिए जाने के मकसद से अदालत के रिकॉर्ड के साथ टेंपरिंग कर 05-01-2016 का 05-11-2016 और 07-01-2016 का 07-11-2016 किया है। कोर्ट ने जिला न्यायाधीश ऊना से रिपोर्ट तलब की।
जिला न्यायाधीश ने रिपोर्ट में कहा कि जिला अदालत द्वारा 23 दिसंबर 2015 को सुनाए गए निर्णय के लिए अपीलार्थी और प्रतिवादी दोनों ने 26 दिसंबर 2015 को आवेदन किया था।
कॉपिंग एजेंसी ने इसे पांच जनवरी 2016 को सत्यापित किया और सात जनवरी 2016 को अपीलार्थी और प्रतिवादी को सौंपी गई। हाईकोर्ट ने इस प्रतिवेदन को खारिज करते हुए दोनों अपीलार्थियो के खिलाफ सात मई 2019 के लिए अवमानना नोटिस जारी किया है।