पहले पर्ची बनाने का एक रुपये लिया जाता था। पूर्व भाजपा सरकार ने वर्ष 2018 में मरीजों से पर्ची के पैसे लेने बंद कर दिए थे। अब 8 साल बाद मरीजों से पर्ची के पैसे लिए जा रहे हैं। पर्ची का शुल्क तय करने और अल्ट्रसाउंड, एक्सरे की निशुल्क सुविधा बंद करने के पीछे सरकार ने रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की ओर से दी जाने वाली सेवाओं और उपकरणों के रखरखाव को मजबूत एवं बेहतर बनाने का हवाला दिया है। वहीं, सरकार ने आरकेएस को भविष्य में आवश्यकता के आधार पर उपयोगकर्ता शुल्क लगाने के लिए भी अधिकृत किया है।
इनको भी देना होगा शुल्क
सरकार ने 26 मई को जारी राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 14 श्रेणियों को प्रदान की गई निशुल्क डायग्नोस्टिक जांच और एक्सरे की सुविधा वापस लेने का फैसला भी लिया है। इन श्रेणियों में गंभीर बीमारियों से पीड़ित कैंसर व किडनी मरीज, गर्भवती महिलाएं, 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग, टीबी मरीज, दिव्यांग, मानसिक रोगी, जेल बंदी, एनआरएचएम के लाभार्थी, निशुल्क दवा योजना के तहत आने वाले मरीज, आपदा पीड़ित, एचआईवी पॉजिटिव रोगी, बाल सुधार गृह के बच्चे शामिल हैं।
उत्तराखंड में 20, जम्मू-पंजाब में 10 और हरियाणा में पर्ची के लगते हैं 5 रुपये
हिमाचल के पड़ोसी राज्यों में उत्तराखंड में मरीजों के पर्ची के 20 रुपये, जबकि जम्मू-कश्मीर व उत्तराखंड में 10 और हरियाणा में पांच रुपये लिए जाते हैं।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर साधा निशाना
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पहले पर्ची बनाने के पैसे नहीं लगते थे और मुफ्त में रजिस्ट्रेशन होता था। लेकिन प्रदेश में गंभीर आर्थिक संकट है और ऐसे में सुक्खू सरकार कई मुफ्त सेवाओं में कटौती कर रही है। बीते समय में स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल ने इस मुद्दे पर तर्क दिया था कि लोग पर्ची संभाल कर नहीं रखते हैं और ऐसे में सरकार अब शुल्क लेगी। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि अमृत काल में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूरे देश को फ्री ड्रग पॉलिसी के तहत निशुल्क उपचार और फ्री डायग्नोस्टिक इनिशिएटिव सर्विसेज के तहत निशुल्क जांच की सुविधा दी गई है, जो देशवासियों का संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार है। यह दुखद है कि कांग्रेस की सुक्खू सरकार हिमाचल के लोगों का यह मौलिक अधिकार छीन रही है। अब प्रदेशवासी बीमारी से ग्रस्त होकर अगर अस्पताल भी जाए तो वहां भी सरकार शुल्क वसूल रही है। सुख की सरकार शुल्क लगाने में यकीन रखती है, सुविधाएं देने में नहीं। अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं, एक्स-रे मशीन खराब हैं, लैब टेक्नीशियन नहीं हैं, सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं हैं। जांच के लिए आईजीएमसी जैसे अस्पताल तीन से छह महीने बाद का समय दे रहे हैं। लेकिन सरकार शुल्क लगाने में व्यस्त है। जब जांच का खर्च एनएचएम के माध्यम से केंद्र सरकार उठा रही है तो सुख की सरकार प्रदेशवासियों से यह अधिकार क्यों छीन रही है?
हिमाचल में तानाशाही सरकार का राज: त्रिलोक
भाजपा के प्रदेश महामंत्री त्रिलोक कपूर ने कांग्रेस सरकार पर हमला करते हुए कहा कि वर्तमान सुक्खू सरकार शुल्क वाली सरकार बनकर रह गई है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पर्ची बनाते समय मरीजों से 10 रुपये का परामर्श शुल्क लिया जाएगा। त्रिलोक कपूर ने कहा कि प्रदेश में तानाशाही सरकार का राज चल रहा है। कपूर ने कहा कि भाजपा ने देश भर में और प्रदेश में भी आयुष्मान एवं हिम केयर योजना के तहत जनता को मुफ्त इलाज की सुविधा दी थी।