पहले पैदल, फिर जीप योग्य और अंत में बस योग्य पुल बनाने की घोषणाओं के साथ तीन मर्तबा शिलान्यास। आठ गावों की लाइफलाइन सरीखे इस पुल के नाम पर बीस साल गुजर जाने के बाद महज एक पिल्लर ही मिल पाया है। यह मामला विस क्षेत्र सुंदरनगर में अलसू पुल का है।
डैहर तहसील में अलसीहड़ खड्ड पर पुल निर्माण की सियासत के शिकार लोगों को कांगू से अलसू की 200 मीटर की दूरी के बजाय 5 किमी का फासला तय करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि पिछले चार विस चुनावों में यह चुनावी मुद्दा बना है। इस दफा भी यह पुल चुनावी रण के लिए तैयार है, लेकिन पुल का निर्माण करने में सारा तंत्र नाकाम साबित हो रहा है।
कभी पैदल पुल, कभी जीप योग्य और कभी बस योग्य पुल की आस बंधाने वालों ने सुंदरनगर विधानसभा क्षेत्र से वादे किए। लेकिन अलसू पुल का काम एक पिल्लर के निर्माण से आगे नहीं बढ़ पाया। नतीजतन 20 साल पहले 24 लाख की लागत वाले पुल की वर्तमान अनुमानित लागत बढ़कर ढाई करोड़ पार कर गई है। 70 मीटर लंबे पुल का इंतजार लगातार लंबा खिंचता जा रहा है।
नेताओं से मांगेंगे जवाब
बीस साल से पुल की बाट जोह रहे ग्रामीण नेताओं से हिसाब चाहते हैं। स्थानीय निवासी परस राम, रमेश कुमार, सुनीता देवी, बेली राम व पंकज का कहना है कि जब-जब भी इस पुल का शिलान्यास हुआ, हर बार इसका एक साल में निर्माण पूरा करने का दावा होता रहा। लेकिन पुल धरातल पर नहीं उतर पाया। चुनाव के समय नेताओं से वे इन वादों का पूरा हिसाब मांगेंगे।
लोक निर्माण विभाग के डैहर में तैनात सहायक अभियंता इंजीनियर हितेश शर्मा ने कहा कि बरसात के कारण पुल के निर्माण कार्य में ठहराव आ गया था। विभाग ने ठेकेदार को शीघ्र ही इसका निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए हैं।