हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे इंतजार के बाद हिमाचल प्रदेश के लिए 2600 टन यूरिया खाद की खेप पहुंच गई है। बारिश के बाद खेतों में फसलों की बढ़वार तेज होने के साथ किसान खाद के छिड़काव में जुट गए हैं। ऐसे समय में यूरिया की उपलब्धता को कृषि विशेषज्ञ मक्का, हरी सब्जियों और सेब की फसलों के लिए काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश के लिए आई 2600 टन यूरिया में से करीब 1300 टन की खेप चंडीगढ़ और लगभग 1300 टन की खेप होशियारपुर पहुंची है। यहां से निर्धारित आवंटन के अनुसार खाद को विभिन्न जिलों में भेजा जाएगा ताकि किसानों को समय पर इसकी उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
वहीं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब के बागानों में भी पौधों की पोषण आवश्यकता को देखते हुए यूरिया की मांग बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर खाद मिलने से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर होने की संभावना रहेगी। इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक पवन कुमार ने बताया कि यूरिया की खेप का वितरण निर्धारित योजना के अनुसार किया जाएगा। साथ ही एनपीके की अगली खेप उपलब्ध कराने के लिए भी संबंधित एजेंसियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। किसानों को सलाह दी गई है कि आवश्यकता के अनुसार ही खाद का प्रयोग करें और कृषि विभाग की अनुशंसित मात्रा का पालन करें।
एनपीके 12-32-16 खाद का इंतजार
किसानों की चिंता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। प्रदेश में एनपीके 12-32-16 खाद की खेप का अब भी इंतजार है। यह मिश्रित उर्वरक मक्का समेत कई खरीफ फसलों की शुरुआती वृद्धि और जड़ विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। किसानों का कहना है कि यूरिया की उपलब्धता राहत देने वाली है, लेकिन एनपीके खाद समय पर नहीं पहुंची तो कई क्षेत्रों में खेती का कार्य प्रभावित हो सकता है।