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हिमाचल चुनाव को लेकर मुश्किल में कांग्रेस आलाकमान, किसे बनाए चेहरा

Fri, 13 Oct 2017 05:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश को कांग्रेस मुक्त बनाने के लिए भाजपा भविष्य की रणनीति बनाने में लग गई है। कांग्रेस मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर कसे शिकंजे के बाद राजनीतिक तौर पर उलझ गई है। कांग्रेस के सामने पांच राज्यों की चुनावी समीक्षा से बड़ा सवाल हिमाचल प्रदेश का है, जहां साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
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पार्टी आधिकारिक तौर पर वीरभद्र सिंह के साथ खड़ी दिख रही है लेकिन पार्टी नेता इस मुद्दे पर जल्द फैसला चाहते हैं। हिमाचल से जुड़े पार्टी नेताओं का भी मानना है कि सीएम वीरभद्र के खिलाफ सीबीआई और ईडी की कार्रवाई होने पर पार्टी के सामने क्या विकल्प होगा।

ये सवाल आलाकमान के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण है। अगर वीरभद्र ही पार्टी का चेहरा होंगे तो भी इस सवाल का जवाब जल्द देना होगा। ताकि उसी आधार पर चुनाव की रणनीति बनाई जा सके। पार्टी नेता मानते हैं कि वीरभद्र को सामने रखकर चुनाव लड़ने पर खतरा इस बात का होगा कि भाजपा भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर मैदान में उतरेगी।
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ऐसे में पार्टी का फोेकस सरकार की उपलब्धियों गिनाने से अधिक आरोपों के जवाब तलाशने पर होगा। कांग्रेस उत्तराखंड की तरह पहाड़ी राज्य हिमाचल खोना नहीं चाहती है। कांग्रेस को पंजाब में चेहरा घोषित करने का लाभ मिला लेकिन उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार का कामकाज और चेहरा जनता ने नकार दिया। कांग्रेस में पहली बार दो जगह से चुनाव लड़ने के बाद भी सीएम की हार हुई।

वीरभद्र के साथ खड़ी है पार्टी: अंबिका

हिमाचल से जुड़े इन सवालों पर राज्य की प्रभारी और कांग्रेस महासचिव अंबिका सोनी का कहना है कि वीरभद्र को लेकर कांग्रेस पूरी तरह एक है। वह हमारे वरिष्ठ नेता हैं। पार्टी मानती है कि राजनीतिक विद्वेष के चलते ही उन पर निशाना साधा जा रहा है।

कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। हिमाचल में विधानसभा चुनाव से जुड़ा कोई भी फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ही लेना है।
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'भाजपा को करनी का फल जल्द भुगतना पड़ेगा'

वहीं, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स और उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि पार्टी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ है। भाजपा को अपनी करनी का फल यहीं और जल्द भुगतना पड़ेगा। मंगलवार को शिमला से जारी बयान में दोनों मंत्रियों ने चेताया है कि अगर मुख्यमंत्री के खिलाफ गैर कानूनी कार्रवाई करने की कोई भी कोशिश हुई तो इसके उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि पिछले चार साल से भाजपा प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता फैलाने की कई कोशिश करती आई है, लेकिन लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई प्रदेश सरकार पर कोई भी अलोकतांत्रिक कदम किसी भी स्तर पर राज्य की जनता सहन करने वाली नहीं है।

मंत्रियों ने कहा है कि मुख्यमंत्री को जांच एजेंसियों की ओर से बार-बार तलब करना दुर्भाग्यपूर्ण है। यहां तक कि बेटी के विवाह समारोह के दौरान मुख्यमंत्री के घर पर भाजपा के अंदरूनी निर्देश पर सीबीआई रेड का भी उन्होंने विरोध नहीं किया।

वीरभद्र सिंह कांग्रेस पार्टी के सर्वोच्च और सम्मानित नेता हैं। वह अपने नेता का अपमान खामोशी से सहन नहीं करेंगे। मंत्रियों ने कहा है कि अब जब प्रदेश में इस वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ षड्यंत्र रचकर वे प्रदेश के लोगों को गुमराह कर अपना राजनीतिक हित साधना चाहते हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस विकास और कल्याण के एजेंडे पर चुनाव लड़ेगी।
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