विधायक विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश की जयराम सरकार पूर्व कांग्रेस सरकार के छह माह के जनहित में लिए फैसलों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने सरकार और सीएम को चेताया कि यदि पिछली सरकार के जनहित में लिए फैसलों को बदलने या रद्द करने का प्रयास किया गया तो प्रदेश कांग्रेस जनता के साथ मिलकर विरोध करेगी।
मुख्यमंत्री को जंजैहली से सबक लेना चाहिए। हालांकि इसमें कांग्रेस का कोई हाथ नहीं था, मगर यह जनभावना के खिलाफ था। पिछली सरकार के फैसलों को राजनैतिक द्वेष भावना से रद्द न किया जाए।
शिमला ग्रामीण क्षेत्र में सोलह मील में कॉलेज भवन बनकर तैयार है। चनोग में कॉलेज का फैसला भी पिछली सरकार का था। द्वेष की भावना से यदि इन फैसलों को पलटा जाता है, तो यह कांग्रेस और आम जनता को भी मंजूर नहीं होगा।
पत्रकारों से बात करते हुए जयराम पिछली वीरभद्र सरकार को कोसने के बजाय जिन वादों और विजन के साथ चुनाव जीतकर आए हैं, उन्हें पूरा करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर आगे बढ़ें।
जयराम ठाकुर पूर्व सरकार का 45000 करोड़ का कर्ज छोड़े जाने के बयान न देकर यह बताएं कि प्रदेश और केंद्र में सत्तासीन हुई भाजपा की सरकारें हैं, तो इस डेढ़ माह में केंद्र सरकार से कर्ज कम करने को कितनी मदद मिली।
पूर्व में रही धूमल सरकार ने भी कांग्रेस पर 28000 करोड़ का कर्ज छोड़ा था। हिमाचल के पास आय के संसाधन नहीं हैं, ऐसे में प्रदेश आर्थिक मदद के लिए आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और नाबार्ड जैसे वित्तीय संस्थानों पर निर्भर करता है।
तीस हजार करोड़ के घोटालों पर चुप्पी तोड़ें पीएम, वित्तमंत्री
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री हाल ही में उजागर हुए 25 से 30 करोड़ के घोटालों पर चुप्पी तोड़ें। पीएनबी के ग्यारह हजार करोड, मेहुल के 6000 और विक्रम कोठारी के हजारों करोड़ के घोटाले इसी केंद्र की सरकार के कार्यकाल में हुए हैं।
केंद्र की सरकार के नाक तले यह करोड़ों के घोटाले हुए, इस पर रोक लगाने का प्रयास नहीं किया गया। जो कार्रवाई अब तक हुई है। उन्होंने कहा कि इन तमाम घोटालों पर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री चुप्पी तोड़ें और जनता को इसका जवाब देग।