पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे और शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से विधायक विक्रमादित्य सिंह ने शनिवार सुबह मंत्रियों-विधायकों के यात्रा भत्ते को लेकर लाए विधेयक का विरोध किया लेकिन सदन में इस मामले को लेकर चुप्पी साध ली।
सदन में जब इस विधेयक को लेकर चर्चा हुई तो विक्रमादित्य ने अपना पक्ष नहीं रखा। जब इस बाबत विधायक से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह उनका व्यक्तिगत विरोध है। पार्टी ने इस विधेयक का समर्थन किया, इसके चलते वह सदन के भीतर चुप रहे।
शनिवार सुबह विक्रमादित्य ने फेसबुक पर पोस्ट डालकर लिखा - प्रदेश सरकार इस समय वित्तीय संकट से गुजर रही है। भत्ते बढ़ाने से राजकोष पर वार्षिक 2.20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। सदन में जब बिल पेश किया जाएगा तब मैं इस पर अपना विरोध जताऊंगा।
लेकिन सदन में पार्टी लाइन के चलते विधेयक पर चर्चा के दौरान विक्रमादित्य सिंह मौन हो गए। उन्होंने भत्ते बढ़ाने के विरोध में एक शब्द भी नहीं बोला। उधर, विधायक की सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट को लेकर लोग खूब मौज ले रहे हैं।