इनमें से किसी एक के नाम पर तीन सदस्यीय कमेटी सोमवार को मुहर लगाएगी। इसके अलावा जिला शिमला की सात विधानसभा क्षेत्रों से सभी नाम लगभग फाइनल कर दिए हैं। इनमें ठियोग से संभावित उम्मीदवार कुलदीप राठौर , कसुम्पटी से अनिरुद्ध सिंह , रामपुर से नंदलाल, रोहडू से मोहन लाल ब्राक्टा, जुब्बल कोटखाई से रोहित ठाकुर , चौपाल से रजनीश किमटा और शिमला ग्रामीण से विक्रमादित्य का नाम सामने आ रहा है।
दिल्ली में शनिवार को हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में यह नाम फाइनल किए गए हैं। जब शिमला शहरी सीट के नाम पर चर्चा हुई तो किसी एक उम्मीदवार के नाम पर सहमति नहीं बनी। शिमला शहर से चार संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा हुई। इनमें यशवंत छाजटा , महेश्वर चौहान , हरीश जनारथा और नरेश चौहान के नाम सामने आए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अपने अपने उम्मीदवारों की पैरवी करते नजर आए। शिमला सीट पर बैठक में काफी गहमागहमी हुई। इसी बीच हाली लॉज के करीबी यशवंत छाजटा को टिकट की दौड़ से बाहर कर दिया गया। फैसला लिया गया कि शेष तीन नामों में से किसको टिकट देनी है यह निर्णय कमेटी सोमवार को लेगी।
वीरभद्र सिंह के करीबी रहे हैं महेश्वर
बैठक में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने जोरदार तरीके से महेश्वर चौहान को टिकट देने की वकालत की। महेश्वर चौहान 1995 से कांग्रेस से जुड़े हैं और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी भी रहे हैं। युवाओं में महेश्वर की अच्छी पकड़ और बेहतर छवि है। नगर निगम शिमला के पार्षद भी रह चुके हैं। मुकेश, महेश्वर के अलावा किसी दूसरे नाम पर सहमत नहीं दिखे।
आनंद और सुक्खू की पसंद नरेश
पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नरेश चौहान को टिकट देने की जोरदार पैरवी की। बैठक में दोनों वरिष्ठ नेताओं ने दो टूक कहा कि वह ऐसे व्यक्ति को टिकट देने के बिल्कुल खिलाफ हैं, जो कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ चुका है और अपने चुनाव हार चुका है। बता दें, नरेश चौहान करीब पैंतीस साल से कांग्रेस से जुड़े हैं और सुक्खू के खास माने जाते हैं।
सर्वे में जनारथा सबसे आगे: अंबिका
बैठक में सोनिया गांधी की करीबी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने हरीश जनारथा का नाम लेकर सबको चौंका दिया। सोनी ने कहा कि जनारथा का नाम सर्वे में सबसे आगे है और यह कांग्रेस के लिए एक जिताऊ प्रत्याशी साबित होंगे। इन्हें दो बार विधानसभा चुनाव लड़ने का बेहतर अनुभव है। काफी कम अंतर से चुनाव हारे हैं। इस बात का आनंद शर्मा और सुक्खू ने कड़ा विरोध किया और बैठक में माहौल गरमा गया। अंबिका सोनी इस बात पर अंत तक अड़ी रही कि वह 68 विधानसभा क्षेत्रों में से केवल एक सीट पर अपने चहेते प्रत्याशी के लिए टिकट मांग रही हैं और उनके कहने पर यह टिकट जनारथा को दे दिया जाए।