इन पदों के लिए प्रदेश भर से 17 हजार 890 आवेदन आए। 20 सितंबर, 2004 को इन पदों पर 300 की जगह 365 पद भर दिए गए। 12 मई 2005 को 13 और पद भर दिए गए, लेकिन इसी बीच भर्ती विवादों के घेरे में आ गई। लंबे विवाद के बाद कोर्ट के आदेश पर शिमला पुलिस ने 14 मार्च, 2017 को तत्कालीन एमडी, डीएम समेत पांच लोगों को आरोपी बनाकर थाना सदर में एफआईआर दर्ज कर ली।
साथ ही मामले की छानबीन के लिए डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन कर दिया। जांच टीम ने परिवहन निगम के एमडी को पत्र लिखकर मामले में पूछताछ के लिए विभिन्न डिविजन के सात अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया था। इनमें चार आरएम, एक डीएम और दो डीडीएम शामिल हैं।