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शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सोलर प्लांट लगाने वाली कंपनी को उपभोक्ता के साथ हुई धोखाधड़ी और सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने मैसर्स ग्रीनट्रैक सोलर प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिए हैं कि वह उपभोक्ता दिलीप सिंह चतरांटा को सब्सिडी की बकाया राशि 22,400 रुपये 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ, हर्जाना और मुकदमे का खर्च के एवज में 35,000 रुपये प्रदान करें।
जुब्बल तहसील के निवासी दिलीप सिंह ने अक्तूबर 2020 में कंपनी से 3 किलोवाट का रूफटॉप सोलर प्लांट लगवाया था। कंपनी ने उन्हें कुल लागत 1,29,700 रुपये जमा करने को कहा और आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी की कुल राशि (62,400 रुपये) उनके खाते में रिमिट कर दी जाएगी। हालांकि, कंपनी ने न तो समय पर सब्सिडी की प्रक्रिया पूरी की और न ही पूरी राशि लौटाई। लंबे समय तक परेशान होने के बाद कंपनी ने मई 2023 में मात्र 40,000 रुपये का भुगतान किया जिसके बाद शेष राशि के लिए उपभोक्ता को कानूनी नोटिस भेजना पड़ा। मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने कंपनी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि यह मामला समय सीमा से बाहर है। आयोग ने पाया कि कंपनी ने शेष सब्सिडी राशि का भुगतान नहीं किया है जो सेवा में स्पष्ट कमी है। आयोग ने कंपनी को यह आदेश आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए हैं।