हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर पर झूठी जानकारी देने के आरोपों की जांच के लिए विवि प्रशासन ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई है। सीनियर प्रोफेसर की अध्यक्षता में गठित कमेटी संबंधित प्रोफेसर के पीएचडी प्रकरण की जांच करेगी। अमर उजाला ने एक जनवरी, 2020 के अंक में केंद्रीय विवि के प्रोफेसर पर झूठी जानकारी देने का आरोप शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
विद्यार्थी परिषद ने भी गत दिवस विवि के कुलपति प्रो. एसपी बंसल को ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग उठाई थी। एबीवीपी का आरोप है कि विवि के संबंधित प्रोफेसर ने झूठी जानकारी देकर केंद्रीय विवि की छवि को खराब करने का प्रयास किया है। आरोप है कि प्रोफेसर ने विवि की वेबसाइट पर दावा किया है कि उन्होंने मानव भारती विवि सोलन के एक शोधार्थी को पीएचडी करवाने में गाइड एवं सुपरवाइजर की भूमिका निभाई है।
हैरत की बात है कि मानव भारती विवि के ही रजिस्ट्रार ने लिखित में जानकारी दी है कि उनका विवि पीएचडी कोर्स नहीं चलाता। इससे केंद्रीय विवि के प्रोफेसर के इस दावे पर प्रश्न चिह्न खड़े हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रोफेसर ने गलत जानकारी देकर पदोन्नति भी हासिल की है। अब इस सारे प्रकरण की जांच कर कमेटी सात दिन में रिपोर्ट विवि प्रशासन को सौंपेगी।
एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति के लिए यह होती हैं शर्तें
किसी भी विवि में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर आठ साल का कार्य अनुभव और एक शोधार्थी को पीएचडी गाइड के तौर पर सेवाएं देने की शर्त है। सूत्रों के मुताबिक विवि के कुछ शिक्षक भर्ती एवं पदोन्नति की इन शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। इसलिए कमेटी की जांच में यह भी सामने आएगा कि इस तरह के अन्य कितने मामले हैं।
केंद्रीय विवि के जिस प्रोफेसर ने पीएचडी करवाने का दावा किया है, उनके खिलाफ विवि प्रशासन ने जांच करवाने का निर्णय लिया है। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विशाल सूद, रजिस्ट्रार, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विवि धर्मशाला।