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अफसरों की सलाह पर रोके कैबिनेट में कई प्रस्ताव, सीएम वीरभद्र सिंह ने लगाई रोक

Wed, 20 Sep 2017 01:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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मंत्रिमंडल की बीते दिन हुई बैठक  में कई  एजेंडा प्रस्तावों पर अधिकारी अड़ गए। मुख्यमंत्री ने बैठक में अफसरों से सलाह-मशवरा कर इन्हें रोक दिया। आईटी उद्योग को करों में राहत देने का मामला दूसरी कोशिश के बाद वित्त के अड़ंगे के चलते लंबित रहा। 
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चाय बागानों का लैंड यूज बदलने के दो मामलों को भी अफसरों की सलाह पर रोक दिया। अनुबंध शिक्षकों को राहत देने का मसला भी अफसरों की सलाह के चलते आगे नहीं बढ़ा है। अब मंत्रियों के लिए अगला मौका 27 की प्रस्तावित कैबिनेट में मिलेगा।

सोमवार को सवा छह घंटे लंबी चली कैबिनेट की मैराथन बैठक में कुछ मुद्दों पर अफसरों की राय मंत्रियों से भिन्न होने से उन्हें रोक दिया गया। सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को टैक्स में छूट देने का मामला दूसरी बार मंत्रिमंडल के सामने आया। 
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आबकारी मंत्री प्रकाश चौधरी वर्ष 2013 से आईटी इंडस्ट्री को छूट देने के पक्ष में थे। सूत्रों के मुताबिक मंत्री का तर्क था कि आईटी इंडस्ट्री को मिल रही छूट में आधा दर्जन कंपनियां ऐसी हैं, जिन्हें इसका लाभ नहीं मिला। जबकि वित्त विभाग इससे सहमत नहीं था। सीएम ने अधिकारियों के तर्क के बाद एजेंडा प्रस्ताव टाल दिया। 

कैबिनेट में दो केस चाय बागानों के लैंड यूज बदलने के रखे गए। अधिकारियों ने किन्हीं दो मामलों के लिए विशेष राहत देने को उचित नहीं माना, जबकि नीति में ऐसे प्रावधान नहीं है। हाईप्रोफाइल केस होने के बावजूद कैबिनेट ने इसे रोक दिया। 

हाइडल प्रोजेक्ट बनाने वाली निजी कंपनियों को राजस्व लाभ दिए जाने के मामला भी सिरे नहीं चढ़ा। कुछ धार्मिक संस्थाएं अपने पास मौजूद भूमि का अन्यत्र इस्तेमाल करना चाहती हैं, जिसके लिए लंबे समय से कुछ नेता पैरोकारी कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की सलाह के बाद मामला एजेंडे प्रस्ताव से बाहर हो गया।

भूमि पट्टे देने पर फंसेगा पेच
विधायकों और पूर्व विधायकों को सस्ती दरों पर भूमि के पट्टे आवंटित करने में पेंच फंस सकता है। विधायक और मंत्रियों की ओर से पट्टों की मांग के बाद सरकार मामले को कैबिनेट में लाई। कैबिनेट में भी अफसरों ने पट्टे आवंटित करने के मौजूदा प्रावधानों का हवाला दिया। मंत्रिमंडल ने अफसरों की दलील के बाद यह तय किया कि राजस्व विभाग आए आवेदनों को प्रोसेस करे। सूत्रों की मानें तो पट्टे आवंटित करने में पेच फंस सकता है। राजस्व विभाग की मौजूदा नीति के प्रावधान आड़े आएंगे। विभाग इसमें लीगल राय भी ले सकता है। ऐसे में मामले लटक सकता है।

पुराने मामलों से लिया सबक
हाल ही में हुई कुछ मंत्रिमंडल की बैठकों के निर्णयों से हुए विवाद के बाद मुख्यमंत्री ने अफसरों के खारिज किए प्रस्तावों को रोक लिया। पिछली कैबिनेट में कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति का मामले पर शासन सहमत नहीं था, लेकिन मंत्रियों के दबाव में उसे पारित किया गया। मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी, जिससे सरकार की किरकिरी हुई।
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